UDISE+ Report 2026: यूपी के प्राथमिक स्कूलों में Dropout केवल 0.3%, लेकिन उच्च प्राथमिक में बढ़ी चिंता, शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट जारी
लखनऊ: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी UDISE+ Report 2026 में उत्तर प्रदेश की स्कूली शिक्षा को लेकर महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) में छात्रों की Dropout Rate केवल 0.3% है, जो बेहतर स्थिति दर्शाती है। हालांकि उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6 से 8) में यह दर 6.7% दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय औसत 3.6% से लगभग दोगुनी है।
प्राथमिक स्तर पर बेहतर प्रदर्शन
रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश ने प्राथमिक शिक्षा में छात्रों को स्कूल से जुड़े रखने में अच्छा प्रदर्शन किया है। कक्षा 1 से 5 तक ड्रॉपआउट दर केवल 0.3 प्रतिशत रहने से यह संकेत मिलता है कि प्रारंभिक शिक्षा में नामांकन और निरंतरता बेहतर हुई है।
कक्षा 6 से 8 में बढ़ी Dropout Rate
चिंता की बात यह है कि उच्च प्राथमिक (कक्षा 6 से 8) में बड़ी संख्या में छात्र बीच में पढ़ाई छोड़ रहे हैं। 6.7% की ड्रॉपआउट दर राष्ट्रीय औसत 3.6% से काफी अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि कक्षा 5 के बाद छात्रों को विद्यालय में बनाए रखने के लिए विशेष रणनीति अपनाने की जरूरत है।
माध्यमिक स्तर पर स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, माध्यमिक स्तर पर उत्तर प्रदेश की Dropout Rate 8.4% है, जबकि राष्ट्रीय औसत 9.5% है। यानी इस स्तर पर राज्य का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से बेहतर है।
छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) भी चिंता का विषय
UDISE+ रिपोर्ट में Pupil Teacher Ratio (PTR) पर भी ध्यान दिलाया गया है।
- प्राथमिक स्तर: एक शिक्षक पर लगभग 19 छात्र, जो राष्ट्रीय औसत के बराबर है।
- उच्च प्राथमिक स्तर: एक शिक्षक पर 21 छात्र, जबकि राष्ट्रीय औसत 17 छात्र है।
- माध्यमिक स्तर: उत्तर प्रदेश में एक शिक्षक पर 23 विद्यार्थी, जबकि राष्ट्रीय औसत 15 विद्यार्थी है।
शिक्षा मंत्रालय ने दिए सुधार के संकेत
रिपोर्ट से स्पष्ट है कि प्राथमिक शिक्षा में सुधार के बावजूद कक्षा 6 से 8 के बीच छात्रों को स्कूल में बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। साथ ही, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर छात्र-शिक्षक अनुपात में सुधार के लिए भी अतिरिक्त प्रयासों की आवश्यकता बताई गई है।
UDISE+ Report 2026 के ये आंकड़े बताते हैं कि उत्तर प्रदेश ने प्राथमिक शिक्षा में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन उच्च प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट कम करने और शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाने पर विशेष ध्यान देना होगा।

