570 संस्कृत विद्यालयों में पढ़ाई का संकट, महज 940 शिक्षकों के भरोसे 2.5 लाख से अधिक स्वीकृत पद
प्रयागराज। प्रदेश के संस्कृत विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी का असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। प्रदेश में 570 माध्यमिक संस्कृत विद्यालय संचालित हैं, जहां शिक्षकों के 2,549 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में महज 940 शिक्षक ही तैनात हैं। वहीं प्रधानाचार्यों की स्थिति भी चिंताजनक है। 657 स्वीकृत पदों के सापेक्ष केवल 170 प्रधानाचार्य कार्यरत हैं।
शिक्षक और प्रधानाचार्यों की कमी से पढ़ाई प्रभावित
शिक्षकों की कमी का सीधा असर विद्यार्थियों की शिक्षा और छात्र संख्या पर भी पड़ रहा है। प्रांतीय संस्कृत विद्यालय कल्याण समिति के प्रदेश महामंत्री आनंद उपाध्याय के मुताबिक संस्कृत विद्यालयों में शिक्षकों के साथ-साथ संसाधनों का भी अभाव है। कई विद्यालय संविदा शिक्षकों के सहारे संचालित हो रहे हैं।
संस्कृत केवल एक विषय नहीं, बल्कि भारतीय दर्शन, वेद, उपनिषद, व्याकरण, साहित्य, ज्योतिष और शास्त्रीय ज्ञान की महत्वपूर्ण भाषा है। विद्यालयों में नियमित पढ़ाई प्रभावित होने से विद्यार्थियों की रुचि पर भी असर पड़ रहा है।
भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी उठे सवाल
समाचार के अनुसार, वर्ष 2011 में मंडलीय समिति के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया हुई थी। अयोध्या, गोरखपुर, देवीपाटन और बस्ती मंडल में नियुक्तियां हुईं, जबकि आजमगढ़ मंडल का मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण नियुक्तियां नहीं हो सकीं।
शासन की ओर से संस्कृत विद्यालयों में प्रधानाचार्य और शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई थी। इसके तहत माध्यमिक संस्कृत विद्यालयों में प्रधानाचार्य और शिक्षकों की भर्ती शिक्षा सेवा चयन आयोग के बजाय विद्यालयों के प्रबंधकों के माध्यम से किए जाने की बात सामने आई है।
वहीं माध्यमिक शिक्षा विभाग के निदेशक प्रताप सिंह बघेल के अनुसार, शासन के आदेश पर नियुक्ति की प्रक्रिया जल्द शुरू होने की संभावना है।
प्रबंधकों को मिल सकता है भर्ती का अधिकार
एडी माध्यमिक कामता राम पाल के अनुसार, संस्कृत विद्यालयों में भर्ती प्रबंधकों के माध्यम से किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, चयन आयोग इन शिक्षकों की नियुक्ति नहीं करेगा।
यदि भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होती है तो लंबे समय से शिक्षकों की कमी से जूझ रहे संस्कृत विद्यालयों और वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

