प्रदेश में शिक्षक-स्नातक कोटे की 11 विधान परिषद सीटों पर चुनाव होना है। भाजपा अभी इनमें से पांच सीटों पर ही प्रत्याशी घोषित कर सकी है जबकि शिक्षक-स्नातक कोटे की कई सीटों पर पेंच फंसा है।
असल में एक प्रमुख शिक्षक संगठन के मुखिया इस चुनाव में सत्ताधारी दल का साथ पाने को बेताब हैं। वो भी तब जब कई चुनावी सीटों पर उनका संगठन अपने प्रत्याशी उतार चुका है। संगठन के एमएलसी के भी भाजपा के साथ आने की संभावनाएं काफी अधिक हैं। वहीं एक अन्य एमएलसी के शिक्षण संस्थानों से जुड़े विवाद उनकी भाजपा में एंट्री में बाधक हैं। बीते दिनों भाजपा कोर कमेटी की बैठक में बाकी बची छह सीटों पर प्रत्याशियों के नामों पर फैसला होना था। मगर ऐसा नहीं हो पाया था। कारण यह है कि एक शिक्षक गुट के मुखिया झांसी-इलाहाबाद स्नातक सीट से भगवा दल का साथ चाहते हैं। वहीं कई सीटों पर उनके संगठन के प्रत्याशी भाजपा के खिलाफ खम ठोंक रहे हैं। अब भाजपा उनकी इस विशेष दावेदारी को पचा नहीं पा रही है। उधर, संगठन के एमएलसी को भाजपा का साथ मिलना तय माना जा रहा है। पिछले चुनाव में भगवा दल ने उनके खिलाफ प्रत्याशी नहीं उतारा था। इस बार उनके भगवा दल से ही उतरने की चर्चाएं हैं।
प्रत्याशियों का ऐलान इसी सप्ताह होने की संभावना
एक और शिक्षक एमएलसी हैं जो इन दिनों भाजपा में आने को लखनऊ से दिल्ली तक पूरा जोर लगाए हुए हैं। दिल्ली में एक नेता से उन्होंने तार भी जोड़ लिए हैं। मगर प्रदेश इकाई में उनके नाम पर सहमति नहीं बन पा रहीं। कुछ दावेदारों ने उनकी यूपी और उसके बाहर की शिक्षण संस्थाओं से जुड़े तमाम दस्तावेज भी लखनऊ से लेकर दिल्ली तक पहुंचा दिए हैं। अब देखना यह है कि इस नूरा-कुश्ती में सफलता किसे मिलती है। जहां तक भाजपा प्रत्याशियों का सवाल है तो आगामी सप्ताह में पार्टी इनका ऐलान कर सकती है।
