69 हजार शिक्षक भर्ती मामला: सुप्रीम कोर्ट में नए सिरे से सुनवाई शुरू, अनारक्षित वर्ग ने जताई नौकरी जाने की चिंता
उत्तर प्रदेश के 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर सुप्रीम कोर्ट में नए सिरे से सुनवाई शुरू हो गई है। इस मामले में आरक्षण नियमों के अनुपालन, वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों के भविष्य और राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित समायोजन को लेकर अहम बहस छिड़ी हुई है।
पीठ और सुनवाई की रूपरेखा
दो सदस्यीय पीठ: मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की दो सदस्यीय पीठ कर रही है।
तीन दिवसीय बहस: सभी पक्षों की दलीलें सुनने के लिए पीठ ने लगातार तीन दिन (मंगलवार, बुधवार और गुरुवार) तक सुनवाई निर्धारित की है।
मुख्य विवाद: हाई कोर्ट का आदेश बनाम कार्यरत शिक्षक
इलाहाबाद हाई कोर्ट का आदेश: 13 अगस्त 2024 को हाई कोर्ट की खंडपीठ ने मूल चयन सूची को रद्द करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि आरक्षण के सभी नियमों का पालन करते हुए तीन महीने के भीतर नए सिरे से चयन सूची तैयार की जाए।
अनारक्षित वर्ग की दलील: हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ अनारक्षित वर्ग के चयनित शिक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। उनका कहना है कि यदि हाई कोर्ट का आदेश लागू होता है, तो पहले से कार्यरत शिक्षकों की नौकरी चली जाएगी। उन्होंने अदालत से नौकरी की सुरक्षा की गुहार लगाई है।
आरक्षित वर्ग की आपत्तियां: दूसरी ओर, आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने आरक्षण नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर हस्तक्षेप अर्जियां दाखिल की हैं और नियमों के अनुसार पूरी सूची दोबारा बनाने की मांग की है।
राज्य सरकार का प्रस्ताव और स्टेटस रिपोर्ट
9,500 अभ्यर्थियों का समायोजन: उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर प्रस्ताव दिया है कि पहले से कार्यरत शिक्षकों को हटाए बिना 9,500 अभ्यर्थियों को समायोजित किया जा सकता है।
अनुच्छेद 142 का संदर्भ: इससे पूर्व जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने पक्षों की सहमति से सुझाव मांगा था कि क्या संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत प्राप्त विशेष शक्तियों का उपयोग कर वर्तमान शिक्षकों को सुरक्षित रखते हुए आरक्षित वर्ग को राहत दी जा सकती है।
4,946 पदों को लेकर विवाद: राज्य सरकार द्वारा सौंपी गई सूची में 4,946 ऐसे अभ्यर्थी शामिल थे, जो मूल मेरिट सूची में थे लेकिन पहले नियुक्ति नहीं ली थी। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इन्हें शामिल करने से आरक्षित वर्ग के अवसर घटते हैं।
अन्य उठाए गए मुद्दे
बीएड योग्यता विवाद: सुनवाई के दौरान बीएड डिग्री धारकों की पात्रता और मान्यता को लेकर भी दलीलें पेश की गईं।
ईडब्ल्यूएस कोटा: आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) आरक्षण के प्रावधानों से जुड़े बिंदुओं पर भी अदालत में चर्चा हुई।

