21 September 2026

पुरानी नियुक्ति रद्द होने की बात छिपाना बर्खास्तगी का आधार नहीं, शिक्षक को राहत : इलाहाबाद हाईकोर्ट

 

पुरानी नियुक्ति रद्द होने की बात छिपाना बर्खास्तगी का आधार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

संतकबीरनगर के सहायक शिक्षक को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने सेवा समाप्ति का आदेश रद्द किया

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि किसी अभ्यर्थी से आवेदन पत्र में पिछली नियुक्ति रद्द होने की जानकारी स्पष्ट रूप से नहीं मांगी गई थी, तो केवल इस आधार पर उस पर तथ्य छिपाने का आरोप लगाकर सेवा समाप्त नहीं की जा सकती। कोर्ट ने संतकबीरनगर के एक सहायक शिक्षक की सेवा समाप्ति के आदेश को अवैध मानते हुए रद्द कर दिया।

यह आदेश न्यायमूर्ति मंज रानी चौहान की एकल पीठ ने संतकबीरनगर निवासी याची की याचिका पर सुनाया।


2015 में शिक्षक पद पर हुई थी नियुक्ति

मामले के अनुसार, याची अनिल कुमार वर्ष 2015 में शिक्षक पद पर नियुक्त हुए थे। वर्ष 2018 में शिकायत के बाद हुई जांच में उनकी विशेष बीटीसी भर्ती में बीएड की डिग्री फर्जी पाई गई थी। इसके बाद वर्ष 2010 में हुई उनकी नियुक्ति को रद्द कर दिया गया था।

बाद में विभाग की ओर से 20 अप्रैल 2019 को उनकी मौजूदा सेवा भी समाप्त कर दी गई। विभाग ने आरोप लगाया कि याची ने अपनी पिछली नियुक्ति रद्द होने के तथ्य को छिपाया था।

याची ने सेवा समाप्ति के इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

आवेदन में जानकारी मांगी ही नहीं गई थी

याची की ओर से दलील दी गई कि वर्ष 2015 की भर्ती के दौरान प्रस्तुत किए गए शैक्षणिक दस्तावेज जांच में सही पाए गए थे। साथ ही आवेदन पत्र में ऐसा कोई स्पष्ट कॉलम नहीं था, जिसमें पिछली नियुक्ति रद्द होने या आपराधिक मामले की जानकारी देना अनिवार्य किया गया हो।

याची की ओर से यह भी कहा गया कि पिछली नियुक्ति का रद्द होना अपने आप में ऐसी जानकारी नहीं थी, जिसे छिपाने के आधार पर नई नियुक्ति समाप्त की जा सके।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला

हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट के अवतार सिंह बनाम भारत संघ के फैसले का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि जब तक आवेदन पत्र में किसी जानकारी को स्पष्ट रूप से मांगा नहीं गया हो, तब तक उस जानकारी को छिपाने का आरोप स्वतः सिद्ध नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने यह भी माना कि वर्तमान नियुक्ति शैक्षणिक योग्यता के आधार पर वैध रूप से हुई थी और पुरानी नियुक्ति की घटना का वर्तमान चयन से सीधा संबंध नहीं था।

2019 का बर्खास्तगी आदेश रद्द

इन तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने विभाग की ओर से वर्ष 2019 में जारी सेवा समाप्ति/बर्खास्तगी के आदेश को रद्द कर दिया। इस फैसले से संबंधित शिक्षक को राहत मिली है।

कोर्ट की टिप्पणी का सार यह है कि आवेदन में स्पष्ट रूप से जानकारी नहीं मांगी गई हो तो केवल उस जानकारी का उल्लेख न करने को तथ्य छिपाने का आधार नहीं बनाया जा सकता।