दिव्या मित्तल अब राजनीति में आएंगी
लखनऊ, आईएएस पद से इस्तीफा देने के बाद दिव्या मित्तल अब राजनीति में किस्मत आजमाएंगी। उन्होंने स्वयं इसका खुलासा मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर किया। उन्होंने अपने भविष्य की योजनाओं का खुलासा किया। कहा कि मैं किसी पार्टी के साथ नहीं जुड़ूंगी। अकेले चलूंगी। मेरा मकसद राजनेता बदलना नहीं, बल्कि पूरी राजनीति को बदलना है। हमारी राजनीति में सत्ता है, शिलान्यास है, शोर है, लेकिन सोच नहीं है। मुझे आजादी के 80 सालों का हिसाब चाहिए।
वर्ष 2013 बैच की आईएएस रही दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त को इस्तीफा दिया। उनका इस्तीफा 15 सितंबर से मंजूर माना गया। दिव्या मेरठ में संयुक्त मजिस्ट्रेट, गौतमबुद्ध नगर में सीडीओ, कानपुर नगर में यूपीसीडा की संयुक्त प्रबंध निदेशक तथा बरेली विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष रहीं। इसके बाद उन्होंने संतकबीरनगर और मिर्जापुर में जिलाधिकारी के रूप में काम किया।
दिव्या ने वीडियो में कहा कि मैंने कुछ दिन पहले आईएएस पद से त्यागपत्र दिया और आपके मन में कई सवाल छोड़ दिए। कुछ दिनों तक जवाब नहीं दिया, क्योंकि काम बड़ा था। मैं हौसला जुटा रही थी, आज सवालों का जवाब देने आई हूं। लोगों ने मुझसे पूछा सब तो बन गई, अब क्या बनना है। इस पर मेरा जवाब है, राजनीति करूंगी। मुझे उन लोगों की आवाज बनना है, जिनकी आवाज किसी दफ्तर तक नहीं पहुंच पाती है और अगर पहुंच भी जाए तो सुनी नहीं जाती।
मुझे गायब स्कूलों का हिसाब चाहिए
एक बार मैं मिर्जापुर लहुरियादह की पहाड़ी पर पानी पहुंचाने के लिए निरीक्षण कर रही थी, तभी एक महिला आई। मुझे लगा उसे कुछ चाहिए, शायद पेंशन या पक्का मकान। उसने कहा कि मैडम हमारे गांव में स्कूल केवल पांचवीं कक्षा तक है। उसके बाद जंगल और पहाड़ के बीच में बच्चों की पढ़ाई का अंत हो जाता है। मुझे आगे की कक्षा तक गांव में स्कूल चाहिए। आज तीन साल होने के बाद भी वह स्कूल बनना शुरू नहीं हुआ। इरादा नहीं था, तो एक फाइल ही पहाड़ बन गई। गायब स्कूलों का हिसाब चाहिए।
दिव्या ने विशेष सचिव राजस्व रहने के दौरान के भी एक वाक्ये का जिक्र किया। एक आदमी पन्नी में कागज लपेटे हुए आया। उसने कहा मैं भूमिहीन था। कुछ साल पहले एसडीएम ने सरकारी जमीन का मुझे पट्टा दिया। कागज तो मिल गया, लेकिन जमीन पर कब्जा नहीं मिला। उन्होंने इसी तरह सरकारी कामकाज के कई उदाहरण दिए। उन्होंने कहा कि जिन झंडों के नीचे 80 सालों का हिसाब नहीं बदला, उनके नीचे खड़े होकर हिसाब नहीं मांगा जा सकता। इसीलिए मैं राजनीति करूंगी, लेकिन किसी दल के साथ नहीं। सिर्फ आपके साथ, लेकिन ये कैसे होगा? इसका जवाब मुझे अपने इस्तीफे के चंद घंटों में ही मिल गया, जहां आम लोगों ने मेरा समर्थन किया, वहीं किसी प्रवक्ता ने लिखा कि रात के अंधेरे में मैं एक दूसरी बड़ी पार्टी के बड़े नेता से मिली, लेकिन ये सच नहीं था। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने मेरा समर्थन किया, उन्हीं लोगों के साथ एक ऐसा मंच बनाएंगे, जो इनसे डरेगा नहीं। यूपी की मिट्टी मेरी कर्मभूमि है, इसीलिए यहीं से ही करूंगी।

