सैदाबाद, । बड़े जोर शोर से बीते महीनों में स्कूल चलो अभियान चलाया गया। लोगों को प्रेरित और आकर्षित करने वाले स्लोगन के साथ गांव-गांव, गली-गली और बाजारों में रैली निकाली गई। आधी रोटी खाएंगे, स्कूल जरूर जाएंगे। मम्मी-पापा हमें पढ़ाओ, स्कूल चलकर नाम लिखाओ। लड़का-लड़की एक समान, सबको शिक्षा, सबको ज्ञान। हर घर में दीप जलाएंगे, हर बच्चे को स्कूल ले जाएंगे आदि। इन सबके बीच कुछ बच्चे ऐसे भी हैं जो स्कूल तक नहीं पहुंच पाए और सड़कों पर भीख मांग रहे हैं।
सैदाबाद बाजार में भीख मांग रहे इन बच्चों का बचपन गरीबी और मजबूरी की भेंट चढ़ता दिखाई दे रहा है। सैदाबाद क्षेत्र के प्रमुख बाजारों और चौराहों पर आए दिन छोटे-छोटे बच्चे लोगों के पीछे घूमकर पैसे मांगते दिखाई देते हैं। कोई वाहन रुकते ही शीशे के पास पहुंच जाता है तो कोई दुकानों के सामने खड़े होकर राहगीरों से मदद की गुहार लगाता है। कई बार ये बच्चे धूप, बारिश और ठंड की परवाह किए बिना घंटों सड़कों पर घूमते रहते हैं।
जिम्मेदार विभागों से उम्मीद: लोगों का कहना है कि सड़क किनारे भीख मांग रहे बच्चों की पहचान कर उनके परिवारों की स्थिति की जांच की जानी चाहिए। जरूरतमंद परिवारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के साथ बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने की व्यवस्था होनी चाहिए। लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभागों से अभियान चलाकर उनके पुनर्वास की दिशा में प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। बचपन किसी भी समाज की सबसे बड़ी पूंजी है। यदि यही बचपन सड़कों पर हाथ फैलाने को मजबूर होगा तो विकास और शिक्षा की तमाम बातें अधूरी ही मानी जाएंगी। जरूरत है कि इन बच्चों को दया के कुछ सिक्कों के बजाय शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान के साथ बेहतर भविष्य दिया जाए।
हंडिया एसीपी शेष्पर पांडेय ने कहा कि भीख मांगने वाले बच्चों की जानकारी पुलिस इकट्ठा कर रही है। मामले में उचित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाएगी।
सैदाबाद खंड शिक्षा अधिकारी अखिलेश यादव ने कहा कि जहां भी इस तरह के बच्चे मिलते हैं उनका दाखिला स्कूलों में कराया जाता है। विभाग हर बच्चों की शिक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। दावे चाहें कुछ भी हों लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों के सामने ऐसे बच्चों को चिन्हित कर विद्यालय से जोड़ना आसान नहीं है।

