केंद्र सरकार के कर्मचारी महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। हाल ही में हुई कुछ केंद्रीय कैबिनेट बैठक में डीए बढ़ोतरी पर ऐलान की उम्मीद थी लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो सका है। मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि सरकार अगले एक हफ्ते में डीए बढ़ोतरी का ऐलान कर देगी। बहरहाल, इस इंतजार के बीच केंद्रीय कर्मचारी अपने-अपने तरीके से डीए और सैलरी बढ़ोतरी का हिसाब जोड़ रहे हैं। सवाल है कि अगर डीए की मौजूदा दर (60%) में 1, 2 या 3 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी होती है तो केंद्रीय कर्मचारियों को हर महीने कितने रुपये अतिरिक्त मिलेंगे? आइए इसे समझ लेते हैं।
कितनी होगी बढ़ोतरी?
मान लीजिए कि डीए की दर 1 प्रतिशत बढ़ती है तो यह 60% से बढ़कर 61% पर पहुंच जाएगी। ऐसे में लेवल 1 कर्मचारियों को हर महीने ₹180 अतिरिक्त मिलेंगे। बता दें कि लेवल 1 के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी ₹18,000 है। वर्तमान में इन कर्मचारियों का डीए 60% की मौजूदा दर से ₹10800 है। डीए में एक प्रतिशत की बढ़ोतरी पर यह डीए बढ़कर ₹10980 हो जाएगा। इसी तरह, 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ डीए 62% होती है तो लेवल 1 कर्मचारियों को मासिक अतिरिक्त राशि ₹360 मिलेगी। वहीं, अगर DA बढ़कर 63% हो जाता है, तो अलग-अलग मूल वेतन स्तरों के हिसाब से मासिक बढ़ोतरी ₹540 से ₹1500 तक हो सकती है।
बता दें कि हर लेवल में बेसिक सैलरी बढ़ती जाती है तो जाहिर है कि डीए में भी उसी हिसाब से इजाफा होगा। अब अगले संशोधन का इंतजार है। वेतन में कितनी बढ़ोतरी होगी, यह सरकार द्वारा तय की जाने वाली अंतिम दर पर निर्भर करेगा।
अक्टूबर तक का एरियर मिलेगा
डीए में जितनी भी बढ़ोतरी होगी, वो बैकडेट में एक जुलाई 2026 से लागू होने वाली है। इसका मतलब है कि केंद्रीय कर्मचारियों को जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर यानी कुल 4 महीने का डीए एरियर मिलेगा। जानकारों की मानें तो केंद्रीय कर्मचारियों को 30 नवंबर की जो सैलरी आएगी, उसमें डीए की बढ़ी हुई रकम जोड़कर आएगी। हालांकि, सरकार ने अभी तक जुलाई के संशोधन या इसके भुगतान की समय-सीमा की पुष्टि नहीं की है। जब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हो जाती, तब तक केवल अनुमान माना जाना चाहिए।
क्या है डीए?
डीए, सैलरी का एक ऐसा हिस्सा है जो महंगाई से जुड़ा होता है। यह केंद्र सरकार के कर्मचारियों को बढ़ती जीवन-यापन लागत का सामना करने में मदद करने के लिए दिया जाता है। सरकार आमतौर पर साल में दो बार इसमें संशोधन करती है, जो 1 जनवरी और 1 जुलाई से लागू होते हैं। जनवरी वाले संशोधन की घोषणा आमतौर पर मार्च या अप्रैल में की जाती है जबकि जुलाई वाले संशोधन की घोषणा अक्सर अक्टूबर में होती है।

