अफसरों की लापरवाही के चलते 3343 ड्राप आउट बच्चों को नहीं मिल सका प्रवेश


बीएसए ने स्कूलों में नहीं दिलाया प्रवेश

हमीरपुर। शिक्षा विभाग के लापरवाह अफसरों ने नए शैक्षणिक सत्र के पांच माह बीतने के बाद भी 3343 ड्राप आउट बच्चों (बीच में पढ़ाई छोड़ देने वाले) को परिषदीय स्कूलों में प्रवेश नहीं दिलाया है।

पढ़ाई नसीब नहीं होने से ये नौनिहाल पूरा दिन इधर-उधर भटकते रहते हैं। इनका भविष्य अंधकारमय होने की आशंका है।


जनपद के सभी ब्लॉकों से पिछले शैक्षणिक सत्र में 3346 ड्राप आउट बच्चे चिह्नित किए गए थे। मगर कोरोना के चलते इन्हें स्कूलों में प्रवेश नहीं दिलाया जा सका था।

अब प्रवेश दिलाने की बारी आई तो अफसरों ने सुध नहीं ली। पांच माह में महज तीन बच्चों को स्कूलों में प्रवेश दिलाया जा सका है। इसका खुलासा ब्लॉक संसाधन केंद्रों से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय को उपलब्ध कराए गए आंकड़ों से हुआ है।

अभी कुछ दिन पूर्व ही बीएसए का चार्ज संभाला है। पूर्व के बीएसए को इस मामले को देखता चाहिए। जल्द ही जिम्मेदारों से ड्राप आउट बच्चों की सूचना मंगाकर स्कूल भेजे जाने की कार्यवाही कराएंगे। राकेश कुमार श्रीवास्तव, बीएसए

बीआरसी की ओर से इस सत्र में ड्राप आउट बच्चों की पूरी सूची उपलब्ध नहीं कराई गई है। सूची मिलते ही सभी ड्राप आउट बच्चों का स्कूलों में पंजीकरण कराया जाएगा। नोडल शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए आठ लाख रुपये मिले हैं। जल्द ही स्कूलों में ड्राप आउट बच्चों को पढ़ाने के लिए भेजा जाएगा।

-मनोज कुमार पॉलीवाल, जिला समन्वयक प्रशिक्षण


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