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25 April 2026

ईको क्लब गठन में सुस्ती: 10 जिलों की स्थिति बेहद खराब, महानिदेशक ने 30 अप्रैल तक का दिया अल्टीमेटम

ईको क्लब गठन में सुस्ती: 10 जिलों की स्थिति बेहद खराब, महानिदेशक ने 30 अप्रैल तक का दिया अल्टीमेटम

लखनऊ | ब्यूरो शिक्षा मंत्रालय के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट 'ईको क्लब फॉर मिशन लाइफ' के क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश के कई जिलों की घोर लापरवाही सामने आई है। बेसिक शिक्षा विभाग के कड़े रुख के बावजूद प्रदेश के अधिकांश जिलों में क्लब गठन की प्रक्रिया अभी भी अधूरी है। इसे गंभीरता से लेते हुए महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने सभी जिम्मेदार अधिकारियों को कड़ी चेतावनी जारी की है।


क्या है 'मिशन लाइफ' ईको क्लब?

इस क्लब के गठन का मुख्य उद्देश्य स्कूली बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बनाना है। इसके माध्यम से छात्रों को:

  • जल और बिजली की बचत,

  • कचरा प्रबंधन (Waste Management),

  • और स्थायी जीवन शैली के व्यावहारिक गुण सिखाए जाने हैं।

लापरवाही के आंकड़े: 10 जिलों में 40% से भी कम काम

विभागीय समीक्षा में पाया गया कि जिला स्तर पर अधिकारी इस महत्वपूर्ण कार्य में रुचि नहीं ले रहे हैं:

  • 10 जिलों में स्थिति सबसे चिंताजनक है, जहाँ अब तक 40 फीसदी से भी कम स्कूलों में क्लब बन पाए हैं।

  • 39 जिलों में 50 फीसदी से कम विद्यालयों में ही इनका गठन हो सका है।

  • बेसिक शिक्षा विभाग की लगातार मॉनिटरिंग के बावजूद जमीनी प्रगति असंतोषजनक है।

30 अप्रैल तक डेटा अपलोड करना अनिवार्य

महानिदेशक मोनिका रानी ने सभी एडी बेसिक, डीआईओएस (DIOS), बीएसए (BSA) और बीईओ (BEO) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि क्लब गठन की विद्यालयवार समीक्षा की जाए।

  • गठित क्लबों के 'नोटिफिकेशन फॉर्म' निर्धारित पोर्टल पर 30 अप्रैल तक हर हाल में अपलोड करने होंगे।

  • शत-प्रतिशत सूचना अपलोड न होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

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