फीस वृद्धि और खास दुकान से ही बच्चों की कॉपी-किताबें खरीदने की शिकायतों के बाद प्रशासन हरकत में आया। डीएम ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण बैठक में नियमों का हवाला देते हुए स्कूलों की नकेल कस दी। साफ कर दिया कि स्कूल पांच साल से पहले यूनिफॉर्म नहीं बदल सकेंगे। ज्यादा फीस ली तो पांच लाख जुर्माना और मान्यता रद्द होगी।
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कलेक्ट्रेट सभागार में जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक में जिलाधिकारी विशाख जी ने स्पष्ट किया कि कोई भी स्कूल बच्चों या अभिभावकों को किसी खास दुकान से किताबें, जूते-मोजे या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। स्कूल की फीस भी तय मानक से ज्यादा वसूल नहीं की जा सकेगी। डीएम ने स्पष्ट किया कि वर्तमान छात्रों के लिए शुल्क में वृद्धि केवल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (प्रतिशत में), छात्र से वसूले पांच प्रतिशत शुल्क के योग की सीमा से अधिक नहीं होगी। डीएम ने कहा कि यूपी स्ववित्तपोषित विद्यालय अधिनियम के तहत फीस वृद्धि की सीमा तय है। हर स्कूल को अपनी वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर फीस का पूरा विवरण देना होगा। किसी भी तरह की कैपिटेशन यानी अतिरिक्त डोनेशन पर प्रतिबंध रहेगा।
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मनमानी की शिकायत कर सकेंगे अभिभावक
डीएम ने एडीएम ज्योति गौतम, जिला विद्यालय निरीक्षक को नोडल अधिकारी नामित किया है। स्कूल नियमों का उल्लंघन करता है, तो अभिभावक, छात्र या पेरेंट्स-टीचर एसोसिएशन शिकायत कर सकते हैं। पांच लाख तक का दंड और बार-बार उल्लंघन पर मान्यता या एनओसी समाप्त कर दी जाएगी।
बैठक में स्कूलों के लिए विशेष निर्देश
● किसी खास दुकान से सामान खरीदने का दबाव नहीं बना सकते।
● फीस या किसी भी शुल्क की अनिवार्य रूप से रसीद देनी होगी।
● स्कूलों को वेबसाइट और सूचना पट पर फीस का ब्योरा दर्ज करना होगा
● छात्र, अभिभावक या अभिभावक अध्यापक एसोसिएशन शिकायत कर सकेंगे
● जहां एनसीईआरटी लागू है, वहां एनसीईआरटी की ही किताबें चलेंगी

