20 September 2026

गोरे बच्चे की चाहत में नेपाल से युवतियों की तस्करी: 1 करोड़ रुपये में तय हो रहा 'सौदा'

 गोरे बच्चे की चाहत में नेपाल से युवतियों की तस्करी: 1 करोड़ रुपये में तय हो रहा 'सौदा', सरोगेसी के काले कारोबार का पर्दाफाश

गोरखपुर / नई दिल्ली — भारत-नेपाल सीमा से सटे इलाकों में मानव तस्करी और अवैध सरोगेसी का एक चौंकाने वाला नेटवर्क सामने आया है, जहाँ संपन्न बेऔलाद दंपतियों को बच्चा दिलाने के नाम पर दलाल 1 करोड़ रुपये तक वसूल रहे हैं। इस गोरखधंधे में नेपाल के पहाड़ी इलाकों की आर्थिक रूप से कमजोर युवतियों को निशाना बनाया जा रहा है।

एक स्टिंग ऑपरेशन और खोजी रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे सौदे में मुख्य दलाल मोटी रकम हड़प लेते हैं, जबकि संबंधित युवती को 20 से 25 लाख रुपये दिए जाते हैं।

'गोरे बच्चे' की चाहत और कानूनी नियमों की अनदेखी

जांच में सामने आया कि कई ऐसे अमीर दंपती, जो कानूनी रूप से बच्चा गोद लेने या बार-बार आईवीएफ (IVF) फेल होने की प्रक्रिया से नहीं गुजरना चाहते, वे 'गोरे बच्चे' की चाहत में इन दलालों के संपर्क में आते हैं।

नेपाल के बुटवल, पोखरा और पाल्पा जैसे इलाकों से युवतियों को फुसलाकर या पैसों का लालच देकर सीमा पार भारत लाया जाता है। नेपाली एजेंट सुषमा थापा और स्थानीय दलाल दीपू के अनुसार, कागजी औपचारिकताओं से बचने के लिए इसे आपसी सहमति या फर्जी एग्रीमेंट के जरिए अंजाम दिया जाता है। सीमा पार कराने से लेकर मेडिकल जांच तक की व्यवस्था दलाल खुद कराने का दावा करते हैं।

डेढ़ साल तक कड़ी निगरानी, प्रसव के बाद वतन वापसी

दलालों के नेटवर्क द्वारा लाई गई युवतियों को भारत में करीब एक से डेढ़ साल तक दंपती या दलालों की निगरानी में रखा जाता है। गर्भधारण के बाद उनके खान-पान और वजन पर पूरा ध्यान दिया जाता है, लेकिन उनकी आवाजाही पूरी तरह सीमित कर दी जाती है। बच्चे के जन्म के बाद नवजात को ग्राहक को सौंप दिया जाता है और युवती को वापस नेपाल भेज दिया जाता है।

गरीबी और लाचारी का फायदा

इस दलदल में फंसी युवतियों में अधिकतर वे हैं जो गंभीर आर्थिक तंगी, तलाक या पारिवारिक संकट से जूझ रही हैं। बातचीत में सामने आई 35 वर्षीय एक तलाकशुदा महिला ने बताया कि अपने 20 साल के बेटे और बुजुर्ग मां की आर्थिक मदद के लिए वह इस सौदे के लिए तैयार हुई। गरीबी के चलते परिवार के सदस्यों को भी इस सौदे की जानकारी होती है।

भारत में 'सरोगेसी (रेगुलेशन) एक्ट' के तहत व्यावसायिक सरोगेसी पूरी तरह गैरकानूनी है। इसके बावजूद सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय यह गिरोह सख्त कानूनों और निगरानी को धता बताकर महिलाओं की लाचारी का खुलेआम सौदा कर रहा है।