20 September 2026

स्कूलों में बनेंगे ई-कचरा केंद्र: पुराने मोबाइल और चार्जर होंगे जमा, बच्चों को सिखाया जाएगा वेस्ट मैनेजमेंट

 उत्तर प्रदेश के स्कूलों में बनेंगे ई-कचरा केंद्र: पुराने मोबाइल और चार्जर होंगे जमा, बच्चों को सिखाया जाएगा वेस्ट मैनेजमेंट

लखनऊ — उत्तर प्रदेश के बेसिक और माध्यमिक स्कूलों को अब ई-कचरा संग्रहण केंद्र (E-waste Collection Centers) के रूप में विकसित किया जाएगा। शिक्षा विभाग की इस नई पहल का उद्देश्य छात्रों को इलेक्ट्रॉनिक कचरे की पहचान कराना और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। इस व्यवस्था के तहत छात्र अपने घरों में पड़े अनुपयोगी व खराब इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को अभिभावकों की सहमति से स्कूल में बने संग्रह केंद्र पर जमा कर सकेंगे।

खराब उपकरण सुरक्षित कंटेनरों में होंगे एकत्र

स्कूलों में बनने वाले केंद्रों पर बेकार पड़े केबल, चार्जर, पुराने मोबाइल फोन, कैलकुलेटर, की-बोर्ड और अन्य छोटे इलेक्ट्रॉनिक सामान अलग-अलग एकत्र किए जाएंगे। स्कूली स्तर पर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ई-कचरे को सुरक्षित और सूखे कंटेनरों में ही रखा जाए। बच्चों को घर पर पड़े ई-कचरे को पहचानने और उसे सुरक्षित तरीके से निपटाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

दो चरणों में चलेगा स्वच्छता अभियान

स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया के सुचारू संचालन के लिए सभी जिलों में एक-एक नोडल अधिकारी तैनात किया जाएगा। इसके साथ ही स्कूलों में दो चरणों में विशेष स्वच्छता अभियान भी चलाया जा रहा है:


  • पहला चरण: 30 सितंबर तक
  • दूसरा चरण: 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक

चार रंगों के कूड़ेदानों से होगा कचरे का वर्गीकरण

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को जमीनी स्तर पर सिखाने के लिए स्कूलों में चार अलग-अलग रंगों के डस्टबिन रखे जाएंगे:

  • हरा कूड़ेदान (गीला कचरा): बचा हुआ भोजन, सब्जी और फलों के छिलके।
  • नीला कूड़ेदान (सूखा कचरा): कागज, प्लास्टिक, कांच, रबर और लकड़ी।
  • लाल कूड़ेदान (स्वच्छता अपशिष्ट): प्रयुक्त डायपर और सैनिटरी पैड।
  • काला कूड़ेदान (विशेष देखभाल अपशिष्ट): पेंट के डिब्बे, एक्सपायर्ड दवाएं और खराब बल्ब आदि।

अधिकृत एजेंसियों को सौंपा जाएगा कचरा

महानिदेशक ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) और जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि विद्यालयों में एकत्र किए गए ई-कचरे का निस्तारण केवल अधिकृत रिसाइकिलिंग एजेंसियों के माध्यम से ही कराया जाएगा। पूरी कार्ययोजना और दिशा-निर्देशों को स्पष्ट करने के लिए 30 सितंबर को एक विशेष वेबिनार का आयोजन भी किया जाएगा।