69000 yesterday’s view -
कल शुरू से ही बेंच ने यही स्पष्ट रूप से कहा कि हम सबके लिए ready है but in accordance of law. हम सबको सुनेंगे कोई भी पक्ष या अधिवक्ता छूटेगा नहीं जिस पर मनदीप कालरा जी ने कोर्ट को शुरू से ही article 142 पर लेकर गए कि पुरानी बेंच ने ये कहा था और समस्त पक्ष इसी के अनुसार तैयार है जिस पर बेंच ख़ासा नाराज दिखी और कहा article 142 can’t be used in deviation of law. फिर कोर्ट ने अपील से लेकर समस्त आदेशों को समझा कि हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट ने क्या proceedings हुई है और एक बात उनको समझ में आई कि list revisit का मामला है जो कि prima facie आरक्षण में गड़बड़ी से उत्पन्न हुआ है , सरकार द्वारा दिए गए हलफनामे में बीएड की बात बेंच के समक्ष रखी जिसका बचाव कई माननीय अधिवक्ताओं ने रखा कि बेशक फिलहाल बीएड वर्तमान में पात्र नहीं है लेकिन ongoing advertisement और जिस बीएड को सम्मिलित करने के 2018 के नोटिफिकेशन को अवैध किया है उस पर इसी विज्ञापन से नियुक्तियां हुई हैं जिसका विरोध BTC obc एवं gen के अधिवक्ता मनदीप कालरा जी एवं राकेश द्विवेदी जी ने किया ।
सरकारी अधिवक्ता अंकित गोयल ने इस पर देवेश शर्मा के निर्णय और बाद में जस्टिस अनिरुद्ध बोस की बेंच के निर्णय का हवाला दिया कि नियुक्ति पत्र बंट चुकने वालों के लिए relief थी इसको काउंटर करते हुए मनदीप कालरा जी ने कहा कि कार्यरत बीएड साथियों की नियुक्तियां भी अधीन थी और इनकी वजह से पात्र बीटीसी अभ्यर्थियों का हक मारा गया है । वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी जी ने बीटीसी सामान्य अभ्यर्थियों की पैरवी में कहा कि जिस IA को मैं represent कर रहा हूँ वे बीटीसी सामान्य अभ्यर्थी हैं जो आज पात्र हैं । कोर्ट ने ये तो कहा कि हम किसी के साथ क्रूरता तो नहीं करेंगे लेकिन सबको सुनेंगे और जो law के हिसाब से होगा वही करेंगे बाकी अभी सुनवाई चल ही रही है इसलिए जिसको जैसे जैसे मौका मिलता रहे उसको बोलने दिया जाये । बेंच strict है भसड़ नहीं होने देगी ।
बाक़ी आज दो बजे से लगा है बीएड अभ्यर्थी मजबूती से पक्ष रखे अपना
#rana
