आदेश के अनुपालन से पीछे नहीं हट सकती राज्य सरकार:हाईकोर्ट
लखनऊ, हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) के शिक्षकों को वर्षों तक संविदा पर रखकर कम मानदेय देने को संविधान के अनुच्छेद 23 के तहत निषिद्ध जबरन श्रम और 'क्रूर मजाक' करार दिया है।
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न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की कोर्ट ने राज्य सरकार को चार माह के भीतर केजीबीवी में शिक्षकों के पद स्वीकृत अथवा सृजित करने तथा उनकी सेवा शर्तें नियमित शिक्षकों के समान बनाने के निर्देश दिए हैं। उनके नियमितीकरण पर विचार करने का भी निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह आदेश अर्चना बुद्ध व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिया। याचियों की ओर से अधिवक्ता सक्षम अग्रवाल ने पक्ष रखा। इसके साथ ही, कोर्ट ने आदेश दिया कि जब तक स्थायी व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक सभी केजीबीवी शिक्षकों को निर्णय की तारीख से 17 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाए। उन्हें आरटीई अधिनियम, 2009 की धारा 24(2) केतहत सेवा संबंधी संरक्षण भी मिलेगा।
न्यायालय ने कहा कि यह व्यवस्था पूरे प्रदेश के शिक्षकों पर लागू होगी। केंद्र को सहमति के अनुसार खर्च में हिस्सा देना होगा। हालांकि राज्य सरकार यह कहकर आदेश के अनुपालन से इनकार नहीं कर सकती कि केंद्र से धनराशि स्वीकृत नहीं हुई है।

