साथियों, माननीय सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन रिट याचिका (सिविल) संख्या 1102/2026, राजेश चौहान एवं अन्य बनाम भारत संघ मामले में आए अंतरिम आदेश को लेकर जिस तरह से प्री-आरटीई एक्ट शिक्षकों के बीच भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं, उस पर आंख मूंदकर भरोसा करना आपके हित में बिल्कुल नहीं है। कुछ तथाकथित अगुआकारों और स्वयंभू नेताओं के बहकावे में आकर इस मामले में हस्तक्षेप प्रार्थना पत्र (IA) दाखिल करने की भूल कतई न करें। अगर माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने IA पर कोई एडवर्स ऑर्डर कर दिया तो और चिंता का विषय हो जाएगा। झूठे आश्वासनों और तथाकथित कानूनी चमत्कारों के चक्कर में पड़कर अपनी गाढ़ी कमाई का धन और कीमती समय बर्बाद करने से बचें।
सीधी और स्पष्ट विधिक स्थिति यह है कि राजेश चौहान का प्रकरण किसी भी दृष्टि से प्री-आरटीई एक्ट शिक्षकों को टीईटी से छूट दिलाने का मामला नहीं है। यह वाद मूलतः उन अस्थाई, मानदेय अथवा संविदा कर्मियों की नियमितीकरण प्रक्रिया और सेवा समायोजन से जुड़ा है, जिन्हें बिना तय वैधानिक अर्हताओं के पक्का किया जा रहा था। शीर्ष अदालत ने इस पर बहुत सख्त रुख अपनाते हुए साफ कहा है कि किसी भी अस्थाई शिक्षक को नियमित करने से पूर्व केंद्र सरकार, एनसीटीई (NCTE) और यूजीसी (UGC) के न्यूनतम अनिवार्य मानकों का पालन अनिवार्य होगा। आप सभी प्री-आरटीई शिक्षक पहले से ही पूर्णतः नियमित और स्थायी सेवा संवर्ग में कार्यरत हैं; आपका विधिक संवर्ग और धरातल उन अस्थाई कर्मियों से पूरी तरह अलग है। ऐसे में इस मुकदमे में जबरन पक्षकार बनने का न तो कोई कानूनी आधार है और न ही कोई तार्किक औचित्य।
इसलिए मेरी आप सभी शिक्षक साथियों से स्पष्ट और दो-टूक अपील है कि 3 नवंबर 2026 को प्रस्तावित विभागीय/स्पेशल टीईटी को पूरी गंभीरता से लें और इसमें अनिवार्य रूप से प्रतिभाग करें। किसी भ्रामक कानूनी राहत या हवा-हवाई उम्मीद में आकर परीक्षा से मुंह मोड़ने अथवा इसके बहिष्कार का आत्मघाती कदम उठाने की गलती बिल्कुल न करें।
विश्वास रखिए, यदि कोई साथी किसी कारणवश इस विभागीय परीक्षा को उत्तीर्ण नहीं भी कर पाता है, तो उसके सेवा संरक्षण और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय तक पूरी मजबूती से सीधी कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। किसी भी शिक्षक का अहित नहीं होने दिया जाएगा। फिलहाल किसी भी तरह की अफवाह, चंदे की राजनीति या कानूनी झांसे से दूर रहें, मानसिक भटकाव छोड़ें और पूरी एकाग्रता के साथ 3 नवंबर की परीक्षा में सम्मिलित हों।
राहुल पांडे अविचल

