प्रधानाध्यापिका पद का कार्य कर रही शिक्षिका को वेतन का आदेश

 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रधानाध्यापिका पद पर कार्य करने के लिए सहायक अध्यापिका को उसके पद दायित्व निर्वहन के अनुसार वेतन और भत्तों के भुगतान का निर्देश दिया है। कोर्ट ने याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि शिक्षिका को एरियर, वेतन व अन्य लाभों का भुगतान एक माह के अंदर किया जाए। राज किशोरी कुशवाहा की याचिका पर न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की कोर्ट ने यह आदेश दिया।



राज किशोरी कुशवाहा मऊआइमा, प्रयागराज स्थित जिला पंचायत कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 27 सितंबर 1982 को सहायक शिक्षक के रूप में नियुक्त हुई थीं। 25 जनवरी 1988 को विद्यालय की प्रधानाध्यापिका मधु रानी श्रीवास्तव का निधन हो गया। इसके बाद याची को 15 फरवरी 1988 से प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में नियुक्त किया गया। याची 31 जुलाई 2017 को सेवानिवृत्त तक इसी पद पर कार्यरत रहीं। लेकिन प्रधानाध्यापिका के पद के लिए उसे भुगतान नहीं किया गया है। याची के अधिवक्ता का कहना था कि 1988 से 2017 तक याची ने कार्यवाहक प्रधानाध्यापिका के रूप में कार्य किया। मगर उसे केवल सहायक अध्यापक के पद का वेतन दिया गया। कोर्ट ने कहा कि याची सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्त हुई थी लेकिन स्थायी प्रधानाध्यापिका की मृत्यु के बाद से याची ने लगातार प्रधानाध्यापिका के रूप में काम करती रही । कोर्ट ने कहा कि याची ने 29 वर्षों से अधिक समय तक प्रधानाध्यापिका के रूप में अपनी सेवाएं दीं। लेकिन उन्हें सहायक अध्यापक के पद का वेतन दिया गया। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए 17 फरवरी 1988 से आज तक के सभी लाभों के साथ बकाया वेतन के भुगतान का आदेश दिया है।