27 February 2026

शिक्षकों के मामले में सहानुभूतिपूर्वक विचार करें: हाईकोर्ट

 

📰 शिक्षकों के मामले में सहानुभूतिपूर्वक विचार करें: हाईकोर्ट

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नैनी स्थित शुआट्स (SHUATS) में लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के मामले में सहानुभूतिपूर्वक विचार करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि नियुक्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, और यदि यह संभव नहीं है तो एकमुश्त मुआवजे के विकल्प पर विचार किया जाए।


न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने 51 शिक्षकों की याचिकाओं का निस्तारण करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय उनकी नियुक्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की योजना बनाए और यदि परिस्थितियां अनुकूल नहीं हों तो उन्हें अन्य पाठ्यक्रमों में समायोजित करने या मुआवजा देने के विकल्प पर विचार करे, ताकि शिक्षक अपना भविष्य सुरक्षित कर सकें।

हालांकि अदालत ने विश्वविद्यालय की कार्रवाई को नियमों के अनुरूप माना और यह भी कहा कि राज्य स्तरीय जांच के दौरान अंतिम आदेश दिया जा सकता है। कोर्ट ने यह टिप्पणी भी की कि विश्वविद्यालय के निर्णय में हस्तक्षेप करने का कोई ठोस कारण नहीं दिखता, फिर भी राज्य सरकार नए सिरे से निर्णय ले सकती है।

राज्य सरकार से हस्तक्षेप पर विचार

कोर्ट ने कहा कि यदि विश्वविद्यालय के निर्णय में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता, तो राज्य सरकार याचियों के मुआवजे के संबंध में निर्णय ले और आवश्यकता हो तो विशेष योजना प्रस्तुत करे। शुआट्स को राज्य सरकार के समक्ष तीन सप्ताह के भीतर प्रस्ताव रखने को कहा गया है, जिसके बाद राज्य सरकार तीन सप्ताह में अंतिम निर्णय लेगी।

53 शिक्षकों को हटाने का आदेश

मामले के तथ्यों के अनुसार, शुआट्स ने 53 शिक्षकों को हटाने संबंधी सीनेट के 28 मार्च 2025 के आदेश पर राज्य सरकार द्वारा लगाए गए रोक आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाओं में मांग की गई थी कि शिक्षकों को ग्रांट-इन-एड पोस्ट में समायोजित कर सेवाओं की सुरक्षा दी जाए।

इससे पहले न्यायालय ने कहा था कि स्ववित्तपोषित श्रेणी के 53 शिक्षकों को अंतिम निर्णय तक कार्य करने दिया जाए और वेतन का भुगतान भी किया जाए। शिक्षकों का आरोप था कि वित्तीय अनियमितता के आधार पर विश्वविद्यालय प्रबंधन ने उन्हें सेवा से हटा दिया।

कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान डॉ. सुंधांशु त्रिपाठी समेत अन्य याचिकाकर्ताओं के पक्षों को भी सुना और स्पष्ट किया कि शिक्षा प्रणाली का दायित्व संतुलित दृष्टिकोण अपनाना है।

हाईकोर्ट के इस आदेश से प्रभावित शिक्षकों को फिलहाल राहत मिली है, जबकि अंतिम निर्णय राज्य सरकार द्वारा लिया जाएगा।