27 February 2026

सोशल मीडिया में अदालतों पर अभद्र टिप्पणियां हद पार कर रहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया यूज़र्स को न्यायपालिका पर ऑनलाइन गालियां न देने की चेतावनी दी है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी टिप्पणियां, निष्पक्ष टिप्पणी या किसी फैसले की सोची-समझी आलोचना की सीमाओं को पार कर रही हैं। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने कहा कि अगर कोर्ट अवमानना क्षेत्राधिकार में ऐसे पोस्ट पर संज्ञान लेता है तो इसके गंभीर कानूनी नतीजे होंगे।



कोर्ट ने कहा, ‘हम लोगों को भविष्य में सावधान रहने की याद दिलाना चाहते हैं, क्योंकि सोशल मीडिया पर ऐसे शब्द सर्कुलेट होते हैं, जो बहुत साफ तौर पर अपमानजनक होते हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि ऐसे लोगों पर अवमानना की कार्रवाई होगी तो अदालत सख्त सज़ा देने में हिचकिचाएगी नहीं।’ कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि बोलने की आज़ादी की आड़ में आपराधिक अवमानना के मामले आजकल सोशल मीडिया पर बहुत ज़्यादा हैं। इस तरह के वर्चुअल गलत इस्तेमाल बोलने की आजादी की हद पार करते हैं।


मामला बस्ती जिला अदालत में वकील हरि नारायण पांडे के खिलाफ चल रही अवमानना की कार्यवाही से जुड़ा है। हालांकि आरोपी वकील ने बिना शर्त माफी मांग ली थी। कोर्ट ने कि कहा कि बोलने की आज़ादी के नाम पर सोशल मीडिया पर क्रिमिनल कंटेम्प्ट के बहुत सारे मामले हैं, जो हद पार करते हैं। हाईकोर्ट की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि क्रिमिनल कंटेम्प्ट ऑफ़ कोर्ट होना रोज़मर्रा की बात बन गई है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हालांकि वह इस मुद्दे पर ज्यूडिशियल नोटिस नहीं ले रही है, क्योंकि इसके नतीजे होंगे, लेकिन वह सोशल मीडिया पर क्रिमिनल कंटेम्प्ट के बहुत सारे मामलों पर ध्यान दे रही है। कोर्ट ने कहा कि मीडिया पर की गई गाली-गलौज आलोचना के दायरे में नहीं आ सकती।