प्रयागराज, । घूस लेने के आरोप में पकड़े गए सोरांव तहसील के लेखपाल राजशेखर सिंह और जूही मिश्रा दोनों अभी परिवीक्षा अवधि(प्रोबेशन पीरियड) में थे। दोनों आरोपी 2024-25 बैच के हैं और जुलाई 2024 में नौकरी ज्वाइन की थी।
सोरांव तहसील में उनकी पहली तैनाती थी लेकिन जल्द अमीर बनने की चाहत में घूसखोरी के आरोप में पकड़े गए। पता चला है कि तैनाती के कुछ दिन बाद से ही दोनों रिश्वतखोरी में लग गए थे। दोनों की कई शिकायतें भी अधिकारियों तक पहुंचीं लेकिन कोई एक्शन लेने की बजाय जांच के नाम पर शिकायतों को दबाया जाता रहा। आखिरकार गुरुवार को दोनों का भांडा फूट गया और सलाखों के पीछे पहुंच गए। बताया गया कि राजशेखर और जूही ने पैसों के लेनदेन के लिए बाकायदा ऑफिस खोल रखा था। दोनों फाफामऊ में किराए के कमरे से ही अपने काम निपटाते थे। यहीं फरियादियों व उनके विपक्षियों को बुलाकर मिलते और डील करते थे। सौदा तय होने पर यहीं पैसों का लेनदेन भी करते थे। यही वजह थी कि कई शिकायतों के बाद भी दोनों को सबूतों के साथ पकड़ा नहीं जा सका था। अलग-अलग जिलों के होने बावजूद एक ही तहसील में तैनाती होने की वजह से राजशेखर और जूही धूमनगंज के न्यायनगर में ही रहते थे। दोनों ऑफिस भी साथ ही चला रहे थे।

