नई दिल्ली, एजेंसी। भारत सरकार ने एप्पल, सैमसंग और अन्य स्मार्टफोन कंपनियों को अपने मोबाइल फोन में आधार ऐप को पहले से इंस्टॉल करने के प्रस्ताव पर आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है। इस कदम का स्मार्टफोन की बड़ी कंपनियों ने विरोध किया था। मीडिया रिपोर्ट में सरकार की ओर से यह जानकारी दी गई है।
यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी (यूआईडीएआई) शुक्रवार को दिए अपने बयान में कहा कि आईटी मंत्रालय ने इस प्रस्ताव की समीक्षा की और स्मार्टफोन में आधार ऐप को अनिवार्य रूप से प्री-इंस्टॉल करने के पक्ष में नहीं है। मंत्रालय ने इस निर्णय का कोई कारण नहीं बताया और टिप्पणी के लिए दिए गए सवालों का जवाब भी नहीं दिया। यूआईडीएआई ने कहा कि आईटी मंत्रालय ने इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के हितधारकों के साथ परामर्श के बाद यह निर्णय लिया। पिछले दो वर्षों में यह छठा अवसर था जब सरकार ने किसी ऐप को फोन में प्री-इंस्टॉल करने का प्रयास किया। उद्योग जगत ने सभी छह प्रस्तावों का विरोध किया। स्मार्टफोन निर्माताओं ने कहा कि इस तरह के आदेश से डिवाइस की सुरक्षा और अनुकूलता पर असर पड़ सकता है और उत्पादन लागत भी बढ़ सकती है, क्योंकि भारत और अन्य देशों के लिए अलग उत्पादन लाइन चलानी पड़ेगी। दस्तावेजों के अनुसार एप्पल और सैमसंग ने विशेष रूप से सुरक्षा और डाटा से जुड़े जोखिमों को लेकर चिंता जताई थी। वहीं, इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन के संस्थापक अपार गुप्ता ने आधार प्री-इंस्टॉलेशन प्रस्ताव को हटाने के सरकार के फैसले का स्वागत किया।

