नई दिल्ली। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की कवायद शुरू हुए एक साल पूरे हो गए हैं तथा 19 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के शुद्धिकरण की प्रक्रिया जारी है। एसआईआर के जरिये अब तक लगभग छह करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से हटाये जा चुके हैं। पिछले साल बिहार विधानसभा चुनावों से पहले राज्य में एसआईआर की कवायद शुरू की गई थी।
बिहार में एसआईआर के बाद, वहां की मतदाता सूची से लगभग 65 लाख नाम हटाए गए। इस पर विपक्ष और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है और दस्तावेज न होने से नागरिकों को वोट देने के अधिकार से वंचित कर रहा।
पिछले साल 27 अक्तूबर को घोषित इस कवायद के दूसरे चरण में, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, राजस्थान, छत्तीसगढ़, केरल, पुडुचेरी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, गुजरात, मध्यप्रदेश और गोवा में कुल 10.2 प्रतिशत मतदाताओं के नाम हटाये गए। इन राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों में एसआईआर से पहले मतदाताओं की कुल संख्या 50.99 करोड़ से अधिक थी। इस प्रक्रिया के बाद, मतदाताओं की संख्या 45.81 करोड़ रह गई, यानी इसमें 5.18 करोड़ से अधिक की कमी आई। मतदाता सूची से कुल 66,88,636 मृत मतदाताओं के नाम हटाए गए। इनमें सबसे अधिक 25.47 लाख नाम उत्तर प्रदेश से और उसके बाद पश्चिम बंगाल का स्थान है जहां 24.16 लाख नाम हटाये गए।

