20 July 2026

69000 शिक्षक भर्ती मामला: अभ्यर्थी जंतर-मंतर पहुंचे, आरक्षण और एक अंक विवाद पर तेज हुआ आंदोलन

 

69000 शिक्षक भर्ती मामला: अभ्यर्थी जंतर-मंतर पहुंचे, आरक्षण और एक अंक विवाद पर तेज हुआ आंदोलन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की 69000 शिक्षक भर्ती से जुड़ा विवाद एक बार फिर चर्चा में है। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का आंदोलन अब दिल्ली के जंतर-मंतर तक पहुंच गया है। अभ्यर्थी न्याय की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं और सरकार से सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले का शीघ्र समाधान कराने की अपील कर रहे हैं।

अभ्यर्थियों का नेतृत्व कर रहे धनंजय यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा सरकार को मांगों पर जवाब देने के लिए दिया गया समय पूरा हो चुका है, लेकिन अब तक लिस्ट रीविजिट (List Revisit) को लेकर कोई स्पष्ट कार्रवाई सामने नहीं आई है।

सुप्रीम कोर्ट में लंबित है मामला

जानकारी के अनुसार, 19 मई को हुई सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के 13 अगस्त 2024 के आदेश के अनुरूप लिस्ट रीविजिट के लिए समय मांगा था। इसके बाद अगली सुनवाई तक कार्रवाई पूरी करने की अपेक्षा थी, लेकिन अभ्यर्थियों का आरोप है कि अब तक इस दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।

इसी बीच, 21 जुलाई को प्रस्तावित सुनवाई पर भी सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि इस तारीख पर मामले में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है।

एक अंक विवाद भी बना बड़ा मुद्दा

69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण विवाद के साथ-साथ एक अंक (One Mark Case) का मामला भी लंबे समय से लंबित है।

वर्ष 2019 की शिक्षक भर्ती परीक्षा में एक विवादित प्रश्न के चारों विकल्प गलत पाए जाने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 25 अगस्त 2021 को और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2022 को संबंधित अभ्यर्थियों को एक अतिरिक्त अंक देकर मेरिट के आधार पर नियुक्ति देने का आदेश दिया था।

इसके बाद परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने 11 नवंबर 2022 से 19 जनवरी 2023 तक प्राप्त अभ्यावेदनों की जांच की, जिसमें 2249 अभ्यर्थी एक अतिरिक्त अंक के पात्र पाए गए। हालांकि, अभ्यर्थियों का कहना है कि अभी तक अंतिम नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।

आरक्षण नियमों के पालन की मांग

प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि पिछले लगभग 6 वर्षों से भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण नियमों का पूर्ण पालन नहीं हुआ, जिसके कारण आरक्षित वर्ग के हजारों अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया से बाहर हो गए। उनका कहना है कि बेसिक शिक्षा विभाग को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई करनी चाहिए।

संसद मार्च की तैयारी

जंतर-मंतर पर धरना दे रहे अभ्यर्थियों ने घोषणा की है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो 20 जुलाई को संसद मार्ग तक मार्च निकालकर अपनी मांगों को और जोरदार तरीके से उठाया जाएगा। आंदोलनकारी सरकार से जल्द निर्णय लेकर भर्ती प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की मांग कर रहे हैं।