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20 July 2026

टीईटी अनिवार्यता पर फिर तेज हुआ आंदोलन, मानसून सत्र में सांसदों का घेराव करेंगे शिक्षक संगठन

 

टीईटी अनिवार्यता पर फिर तेज हुआ आंदोलन, मानसून सत्र में सांसदों का घेराव करेंगे शिक्षक संगठन

लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट द्वारा टीईटी (Teacher Eligibility Test) अनिवार्यता को लेकर दिए गए निर्णय के लगभग एक वर्ष बाद भी केंद्र सरकार की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं होने पर देशभर के प्राथमिक शिक्षकों में नाराजगी बढ़ गई है। इसी के चलते अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने एक बार फिर आंदोलन तेज करने का फैसला लिया है।

संघ ने घोषणा की है कि संसद के मानसून सत्र के दौरान देशभर के सांसदों से उनके आवास और कार्यालयों पर मिलकर टीईटी अनिवार्यता के मुद्दे पर ज्ञापन सौंपा जाएगा। संगठन का कहना है कि यदि मानसून सत्र में इस विषय पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो शिक्षक दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन और कूच करेंगे।

25 लाख प्राथमिक शिक्षकों को जोड़ने की तैयारी

अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के अनुसार, देश के लगभग 25 लाख प्राथमिक शिक्षकों के भविष्य और हितों की रक्षा के लिए व्यापक जनसंपर्क अभियान शुरू किया जा रहा है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय ने सभी राज्यों के पदाधिकारियों से अपने-अपने क्षेत्र के सांसदों से संपर्क करने और उन्हें इस विषय की गंभीरता से अवगत कराने का आह्वान किया है।

सांसदों को सौंपा जाएगा ज्ञापन

संघ के निर्देशानुसार शिक्षक प्रतिनिधि अपने-अपने सांसदों से मुलाकात कर उन्हें टीईटी अनिवार्यता के संभावित दुष्परिणामों और शिक्षा व्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव की जानकारी देंगे। साथ ही, सांसदों से अनुरोध किया जाएगा कि वे संसद में इस मुद्दे को उठाएं और केंद्र सरकार से उचित समाधान की मांग करें।

भविष्य की शिक्षा व्यवस्था पर चिंता

शिक्षक संगठन का कहना है कि टीईटी अनिवार्यता से जुड़े वर्तमान प्रावधानों का असर केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव भविष्य की पीढ़ियों और प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। इसलिए इस विषय पर जल्द सकारात्मक निर्णय लिया जाना आवश्यक है।

सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो दिल्ली कूच

संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि संसद के मानसून सत्र में केंद्र सरकार द्वारा प्राथमिक शिक्षकों के पक्ष में कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो देशभर के शिक्षक दिल्ली कूच करेंगे और बड़े स्तर पर आंदोलन चलाया जाएगा। संगठन का कहना है कि यह आंदोलन शिक्षकों के अधिकारों और शिक्षा व्यवस्था के हित में किया जाएगा।

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