नई दिल्ली, एजेंसी। आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई नजदीक आ रही है। ऐसे में लाखों करदाता आयकर रिटर्न दाखिल करने की तैयारी में जुटे हैं। हालांकि, कई लोगों के मन में सवाल है कि अगर धारा 87ए के तहत मिलने वाली विशेष आयकर छूट (रिबेट) से उनका टैक्स शून्य है तो क्या उन्हें आईटीआर भरने की जरूरत है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में भी आईटीआर भरना अनिवार्य है, क्योंकि कर देनदारी और आईटीआर दाखिल करने की अनिवार्यता दो अलग-अलग बातें हैं। इसलिए कर देनदारी नहीं बनने का मतलब यह नहीं कि रिटर्न भरने से भी छूट मिल जाएगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, आईटीआर भरने का फैसला इस बात से नहीं होता कि आखिर में कितनी कर देनदारी बन रही है। यह कटौतियों और 87ए की छूट लेने से पहले कुल आय कितनी है, इस बात पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए यदि कोई वेतनभोगी पुरानी कर व्यवस्था में रिटर्न दाखिल करता है। अगर 80सी, 80डी जैसी कटौतियां लेने के बाद उसकी कर योग्य आय पांच लाख रुपये से कम हो जाती है और 87ए की छूट के कारण उसका कर शून्य हो जाता है, तब भी उसे आईटीआर दाखिल करना पड़ेगा।
रिटर्न न भरने पर जुर्माना
यदि कोई व्यक्ति आईटीआर भरने योग्य होने के बाद भी रिटर्न दाखिल नहीं करता है तो उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है। आयकर अधिनियम की धारा 234एफ के तहत पांच लाख रुपये तक की आय वाले करदाताओं के लिए जुर्माना 1000 रुपये है। वहीं, पांच लाख रुपये से अधिक आय होने पर 5000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। आईटीआर भरने से बैंक लोन, होम लोन, वीजा और अन्य वित्तीय जरूरतों पर फायदे मिलते हैं। आईटीआर आधिकारिक प्रमाण के रूप में काम आता है।
कर देनदारी के लिए कुल आय की ऐसे होती है गणना
आयकर रिटर्न भरते समय आपकी कुल आय देखी जाती है। इसके बाद ही सेक्शन 80सी, 80डी 80सीसीडी, 80जी, 80टीटीए और 80टीटीबी जैसी कटौतियों को घटाया जाता है। यानी पहले आपकी कुल आय देखी जाएगी और उसके बाद यह तय होगा कि आपको कहां कितनी छूट मिलेगी और कितना कर देना होगा। आकलन वर्ष 2026-27 के लिए नई कर व्यवस्था में 12 लाख रुपये तक की आय पर धारा-87ए के तहत टैक्स रिबेट मिलती है। इससे कर देनदारी शून्य हो सकती है। वेतनभोगी कर्मचारी नई व्यवस्था में 75 हजार रुपये की मानक कटौती भी ले सकते हैं। इस तरह 12.75 लाख रुपये तक की कुल सकल वेतन वाले कई कर्मचारियों का कर शून्य हो सकता है। यदि वे सभी शर्तें पूरी करते हैं।
लाख तक की आय पर धारा-87ए के तहत टैक्स रिबेट मिलती है
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क्या कहते हैं आयकर के मौजूदा प्रावधान?
आयकर कानून के अनुसार, कर देना और आईटीआर भरना दो अलग-अलग जिम्मेदारियां हैं। यदि किसी व्यक्ति की सालाना आय आधार सीमा से अधिक है तो उसे आईटीआर दाखिल करना जरूरी होता है। भले ही बाद में कटौतियों और 87ए की छूट के कारण कर की देनदारी शून्य हो जाए।

