सुझाव | यूपी बोर्ड के सचिव ने बेसिक शिक्षा निदेशक को लिखा है पत्र, प्रधानाध्यापक प्रमाणपत्र का नहीं करती जिक्र
जन्मतिथि सत्यापन को चार दस्तावेज मान्य
प्रयागराज, । यूपी बोर्ड ने जन्मतिथि को लेकर बेसिक शिक्षा निदेशक को महत्वपूर्ण सुझाव भेजा है। सचिव भगवती सिंह की ओर से निदेशक अमित भारद्वाज को भेजे पत्र के अनुसार जन्मतिथि के अंकन में परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक उस अभिलेख का उल्लेख नहीं करते, जिसके आधार पर बच्चों के प्रवेश के समय उनकी जन्मतिथि का अंकन किया जाता है। यूपी बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से मुख्यालय पर जन्मतिथि संशोधन संबंधी प्रकरण प्राप्त होते रहते हैं। सही जन्मतिथि के साक्ष्य के रूप में प्राथमिक/उच्च प्राथमिक कक्षाओं की सत्यापित टीसी संलग्न की जाती है।
बहुत से प्रकरणों में यह देखा जाता है कि बच्चे की आयु प्रवेश के समय आरटीई 2009 में निर्धारित आयु से कम होती है। उसके अनुसार कक्षा एक में प्रवेश की आयु छह वर्ष निश्चित की गई है।
चूंकि यूपी बोर्ड की ओर से जारी प्रमाणपत्र में जन्मतिथि तथा नाम का अंकन अति महत्वपूर्ण होता है, इसलिए सभी बीएसए को निर्देशित करने का कष्ट करें कि टीसी के प्रतिस्थापना हस्ताक्षरकर्ता का नाम तथा पदनाम स्पष्ट लिखा हो।
ये दस्तावेज जरूरी
अस्पताल, सहायक नर्स एवं मिडवाइफ पंजी अभिलेख, आंगनबाड़ी का अभिलेख, जन्म एवं मृत्यु संबंधी ग्राम पंजी या माता-पिता या अभिभावक की ओर से बालक/बालिका की आयु की शपथ-पत्र के माध्यम से घोषणा शामिल है। इन दस्तावेजों के आधार पर ही जन्मतिथि का अंकन होना चाहिए।
गलत जन्मतिथि देने पर बोर्ड में बढ़ते जा रहे संशोधन कराने के मामले
“जन्मतिथि संशोधन के लिए कई ऐसे प्रत्यावेदन भी मिलते हैं जिसमें विद्यार्थी की आयु आरटीई में निर्धारित आयु से कम होती है। इस अव्यवस्था को दूर करने के लिए प्रथम प्रवेश में ही सावधानी बरतनी चाहिए।”
— भगवती सिंह, सचिव यूपी बोर्ड

