01 September 2026

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: जूनियर हाईस्कूलों में शिक्षक भर्ती की रिक्तियां घटाना सही, विशेष अपीलें खारिज

 

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: जूनियर हाईस्कूलों में शिक्षक भर्ती की रिक्तियां घटाना सही, विशेष अपीलें खारिज

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जूनियर हाईस्कूलों में सहायक अध्यापक भर्ती से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी जूनियर हाईस्कूल के हाईस्कूल अथवा इंटरमीडिएट कॉलेज के रूप में अपग्रेड और मान्यता प्राप्त हो जाने के बाद उत्पन्न होने वाली नई रिक्तियों को जूनियर हाईस्कूल की रिक्तियां नहीं माना जा सकता।

ये भी पढ़ें - टीईटी पास करो या नौकरी छोड़ो के आदेश ने बढ़ाईं मुसीबत, नए नियम से शिक्षकों में पनप रहा आक्रोश

ये भी पढ़ें - सड़क के गड्ढे में उछली बाइक, गिरने से शिक्षिका की मौत

1262 पद घटाकर 634 करना वैध

मामला 3 नवंबर 2025 को जूनियर हाईस्कूलों में सहायक अध्यापकों के 1262 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किए जाने से जुड़ा था। इसके बाद कुछ संस्थानों के हाईस्कूल अथवा इंटरमीडिएट कॉलेज के रूप में अपग्रेड होने के कारण मार्च 2026 में जारी अधिसूचनाओं में जूनियर हाईस्कूल सहायक अध्यापक भर्ती से अलग कर दी गईं।

इससे रिक्त पदों की संख्या 1262 से घटकर 634 रह गई।

अभ्यर्थियों ने इस निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए विशेष अपील दाखिल की थी।

कोर्ट ने विशेष अपीलें कीं खारिज

अभ्यर्थियों की ओर से दलील दी गई कि भर्ती प्रक्रिया लगभग पूरी होने के बाद रिक्तियों की संख्या कम करना उचित नहीं है। उनका यह भी कहना था कि सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा-2021 में सफल होना अथवा अंतिम चयन सूची में नाम आना नियुक्ति का अटल अधिकार नहीं देता।

कोर्ट ने माना कि वर्तमान मामले में रिक्तियों को घटाने का आधार संबंधित संस्थानों की कानूनी स्थिति और लागू भर्ती नियम थे। इसलिए इसे मनमाना निर्णय नहीं माना जा सकता।

हाईकोर्ट ने 19 फरवरी 2026 के एकल पीठ के फैसले को बरकरार रखते हुए 9 मार्च और 15 मार्च 2026 की अधिसूचनाओं को भी कायम रखा तथा सभी विशेष अपीलें खारिज कर दीं।

📌 फैसले का सार

  • जूनियर हाईस्कूलों में सहायक अध्यापक भर्ती का मामला।

  • प्रारंभ में 1262 रिक्त पद बताए गए थे।

  • बाद में रिक्तियां घटकर 634 पद रह गईं।

  • अपग्रेड होकर हाईस्कूल/इंटर कॉलेज बने संस्थानों की रिक्तियों को जूनियर हाईस्कूल भर्ती से अलग किया गया।

  • हाईकोर्ट ने रिक्तियां घटाने की कार्रवाई को वैध माना।

  • अभ्यर्थियों की विशेष अपीलें खारिज कर दी गईं।

  • एकल पीठ के पूर्व आदेश को बरकरार रखा गया।