निलंबित प्रधानाध्यापिका और शिक्षिका 77 दिन बाद भी संबद्ध स्कूल से गायब, मूल विद्यालय में उपस्थिति लगाने का मामला उजागर
लखनऊ/मोहानलालगंज: उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में निलंबित प्रधानाध्यापिका और सहायक शिक्षिका से जुड़ा एक मामला सामने आया है। स्कूल के छत की सफाई बच्चों से कराने के मामले में निलंबित दोनों शिक्षिकाएं 77 दिन बीतने के बाद भी संबद्ध विद्यालय में नहीं पहुंचीं। आरोप है कि दोनों अपने मूल विद्यालय में जाकर हस्ताक्षर कर रही हैं, जबकि निलंबन आदेश के तहत उन्हें अलग-अलग विद्यालयों से संबद्ध किया गया था।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, मोहनलालगंज के प्राथमिक विद्यालय लतलूमर के बच्चों से स्कूल की छत साफ कराने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। मामले को गंभीरता से लेते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) विपिन कुमार ने प्रधानाध्यापिका श्वेता त्रिपाठी और सहायक शिक्षिका शगुनता रानी को निलंबित कर दिया था।
निलंबन आदेश में दोनों शिक्षिकाओं को अलग-अलग एकल शिक्षक वाले विद्यालयों से संबद्ध किया गया था, ताकि वहां बच्चों की पढ़ाई सुचारु रूप से चल सके। श्वेता त्रिपाठी को प्राथमिक विद्यालय रानीखेड़ा देवती और शगुनता रानी को इसी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय मदारीखेड़ा से संबद्ध किए जाने की बात सामने आई है।
77 दिन बाद भी संबद्ध विद्यालय में नहीं पहुंचीं
रिपोर्ट के मुताबिक, निलंबन के 77 दिन बाद भी दोनों शिक्षिकाएं संबद्ध विद्यालयों में नहीं पहुंचीं। इसके बजाय उनके मूल विद्यालय में जाकर हस्ताक्षर करने की शिकायत सामने आई है। इसको लेकर ग्रामीणों ने आपत्ति जताई है और कई बार दूसरे शिक्षकों से भी शिकायत की है।
BEO की जांच में सामने आई अहम बात
मामले की जांच मुख्यालय के खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) रामराज को सौंपी गई थी। जांच के दौरान स्कूल की रजिस्टर प्रविष्टियों, शिक्षकों के बयानों और बच्चों से बातचीत के आधार पर यह जानकारी सामने आई कि निलंबित प्रधानाध्यापिका और शिक्षिका के मूल विद्यालय में आने की बात कही जा रही है।
इस संबंध में BSA विपिन कुमार ने बताया कि निलंबित प्रधानाध्यापिका और शिक्षिका को अपने मूल विद्यालय जाने और वहां उपस्थिति दर्ज कराने की जानकारी नहीं है। नियमानुसार उन्हें संबद्ध विद्यालय में जाना चाहिए। जांच में यदि मूल विद्यालय जाने की पुष्टि होती है, तो दोनों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब आगे क्या होगा?
शिक्षा विभाग की जांच के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई की जा सकती है। यदि यह पुष्टि होती है कि निलंबन के दौरान दोनों शिक्षिकाएं निर्धारित संबद्ध विद्यालयों में जाने के बजाय मूल विद्यालय में उपस्थित हो रही थीं, तो विभागीय नियमों के तहत कार्रवाई संभव है।

