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26 October 2026

UP Teacher News: इंचार्ज प्रधानाध्यापक नियुक्ति को लेकर याचिका पर आज सुनवाई, वरिष्ठता सूची से तैनाती की मांग

UP Teacher News: इंचार्ज प्रधानाध्यापक नियुक्ति को लेकर याचिका पर आज सुनवाई, वरिष्ठता सूची से तैनाती की मांग

UP Basic Education News: उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में प्रभारी प्रधानाध्यापक एवं प्रभारी प्रधानाध्यापिका की नियुक्ति को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल याचिका पर सुनवाई को लेकर शिक्षकों की नजरें टिकी हैं। यह मामला जनपदीय वरिष्ठता सूची के क्रम में इंचार्ज हेड की तैनाती से संबंधित है।

छोटे विद्यालयों में भी प्रभारी प्रधानाध्यापक की नियुक्ति की मांग

याचिका में मांग की गई है कि प्राथमिक विद्यालय (PS) और उच्च प्राथमिक विद्यालय (UPS) में विद्यार्थियों की संख्या निर्धारित मानक से कम होने पर भी जनपद स्तरीय वरिष्ठता सूची के आधार पर प्रभारी प्रधानाध्यापक या प्रभारी प्रधानाध्यापिका की तैनाती की जाए।

याचिका के अनुसार, प्राथमिक विद्यालयों में 150 से कम तथा उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 100 से कम छात्र-छात्राएं होने की स्थिति में भी वरिष्ठता के आधार पर प्रभारी प्रधानाध्यापक की नियुक्ति का अवसर मिलना चाहिए।

हाईकोर्ट में दाखिल याचिका का विवरण

उपलब्ध कोर्ट स्टेटस के अनुसार, यह मामला Writ-A (WRIA) संख्या 10750/2026 है। याचिका में पुनीत कुमार शुक्ला एवं अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से उत्तर प्रदेश सरकार, बेसिक शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया गया है।

कोर्ट रिकॉर्ड में मामले की स्थिति Pending दर्ज है। उपलब्ध स्क्रीनशॉट के अनुसार, मामले में न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ में सुनवाई सूचीबद्ध रही है।

शिक्षकों को क्या है उम्मीद?

इस मामले में शिक्षकों की मुख्य मांग जनपदीय वरिष्ठता सूची को आधार बनाकर प्रभारी प्रधानाध्यापक की तैनाती से संबंधित है। यदि अदालत इस विषय पर कोई निर्देश देती है, तो उसका प्रभाव संबंधित विद्यालयों में प्रभारी प्रधानाध्यापक की नियुक्ति प्रक्रिया पर पड़ सकता है।

हालांकि, याचिका दाखिल होने या सुनवाई सूचीबद्ध होने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने मांग स्वीकार कर ली है। मामले में आगे की स्थिति कोर्ट के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।

महत्वपूर्ण अपडेट: उपलब्ध स्क्रीनशॉट में अगली सुनवाई की तारीख 26 अक्टूबर 2026 दर्ज है। सुनवाई के बाद पारित आदेश और मामले की वास्तविक स्थिति की पुष्टि आधिकारिक कोर्ट रिकॉर्ड से की जानी चाहिए।