देशभर के प्राथमिक स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट दिलाने के लिए चार राज्यों के शिक्षक सामने आए हैं। सर्वोच्च न्यायालय की दो जजों की पीठ ने एक सितंबर 2025 को आदेश दिया था कि आरटीई लागू होने के पूर्व नियुक्त शिक्षकों को भी सेवा में बने रहने टीईटी पास करना अनिवार्य है। इस मामले में अब क्यूरेटिव याचिकाओं का सिलसिला शुरू हो गया है।
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जम्मू-कश्मीर के प्रीतम सिंह धीमान, उत्तर प्रदेश के मेघराज सिंह तथा मध्य प्रदेश की ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन ने क्यूरेटिव याचिका दायर की है। अन्य राज्यों के शिक्षक भी इसी दिशा में तैयारी कर रहे हैं। क्यूरेटिव याचिकाकर्ताओं का कहना है कि दो सदस्यीय पीठ ने आरटीई के दो परन्तुकों की गलत व्याख्या की है। उनका तर्क है कि आरटीई अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर सेवा में बने रहने के लिए टीईटी की शर्त लागू नहीं होनी चाहिए। मामले की सुनवाई अब सर्वोच्च न्यायालय के तीन वरिष्ठतम न्यायाधीशों तथा मौजूदा दो न्यायाधीशों की पीठ द्वारा किए जाने की संभावना है। इसमें मुख्य न्यायाधीश भी शामिल हो सकते हैं।
खारिज हो चुकी हैं पुनर्विचार याचिकाएं
उत्तर प्रदेश सहित कई राज्य सरकारों ने मूल फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिकाएं दायर की थीं जो 29 मई 2026 को खारिज हो गई थी। इसके बाद क्यूरेटिव याचिकाओं का यह दौर शुरू हुआ है। शिक्षक संगठन इस मामले को संवैधानिक महत्व का बताते हुए उच्चतर पीठ से पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं।

