केंद्र सरकार ने सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं की बिजली निकासी और पारेषण लाइनों में उतार-चढ़ाव के मद्देनजर तीसरे चरण की हरित गलियारा योजना को मंजूरी दी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में 1.86 लाख करोड़ की पीएम धारा योजना को स्वीकृति दी। इसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 135 गीगावाट तक की नवीकरणीय ऊर्जा को ग्रिड और उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए अंतरराज्यीय नहीं, बल्कि राज्य के भीतर पारेषण प्रणाली को मजबूत किया जाएगा।केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि स्वाभाविक रूप से सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं की लाइनों में उतार-चढ़ाव होता रहता है। इससे निपटने के लिए विशेष किस्म के ग्रिड डिजाइन करने की आवश्यकता होती है। इसके लिए ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-3 के 1,86,405 करोड़ रुपये की योजना मंजूर की गई है। उन्होंने कहा कि योजना को वित्त वर्ष 2032-33 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 25 रुपये बढ़ाने को मंजूरी दे दी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि गेहूं की उत्पादन लागत 1,264 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि नए सत्र के लिए एमएसपी 2,610 रुपये रखा गया है।
हरित ऊर्जा गलियारा से नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन, अवसंरचना विकास के साथ ही रोजगार के नए अवसर भी बढ़ने वाले हैं। गेहूं और अन्य फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि देशभर के लाखों किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगी।
-नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
एआई संभालेगा देश की राजधानी का ट्रैफिक
नई दिल्ली। दिल्ली को ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए सरकार ने नया रोडमैप तैयार किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने बुधवार को इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी। इसके तहत एआई और रियल टाइम डाटा की मदद से राजधानी के 42 प्रमुख ट्रैफिक कॉरिडोर को स्मार्ट बनाया जाएगा। एआई युक्त सीसीटीवी कैमरे और रेडलाइट की मदद से यातायात सुगम बनेगा।
और तकनीक से अपराधों पर भी लगाम लगेगी।
दरअसल, सरकार वन नेटवर्क, स्मार्टर ट्रैफिक के तहत दिल्ली में रियल टाइम ट्रैफिक मैनजमेंट प्रणाली लागू कर रही है। रेल, सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि कैबिनेट ने 1,789.52 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। यह परियोजना 24 महीनों में तीन चरणों में पूरी की जाएगी। इसके बाद पांच वर्षों तक इसका रखरखाव और संचालन किया जाएगा। इस परियोजना में 1,092 एडैप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम (एटीसीएस) और 1,029 ऑटोमेटेड एनफोर्समेंट लोकेशन शामिल हैं।
कैबिनेट ने नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के मकसद से ‘हरित ऊर्जा गलियारा’ योजना का तीसरा चरण आरंभ करने को भी मंजूरी दी है। इसके लिए लिए 1.86 लाख करोड़ रुपये की ‘पीएम धारा’ स्वीकृत की गई। योजना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 135 गीगावाट तक की नवीकरणीय ऊर्जा को ग्रिड और उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए अंतरराज्यीय नहीं, बल्कि राज्य के भीतर पारेषण प्रणाली को मजबूत किया जाएगा।
नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। केंद्र सरकार ने सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं की बिजली निकासी और पारेषण लाइनों में उतार-चढ़ाव के मद्देनजर तीसरे चरण की हरित गलियारा योजना को मंजूरी दी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में 1.86 लाख करोड़ की पीएम धारा योजना को स्वीकृति दी। इसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 135 गीगावाट तक की नवीकरणीय ऊर्जा को ग्रिड और उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए अंतरराज्यीय नहीं, बल्कि राज्य के भीतर पारेषण प्रणाली को मजबूत किया जाएगा।केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि स्वाभाविक रूप से सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं की लाइनों में उतार-चढ़ाव होता रहता है। इससे निपटने के लिए विशेष किस्म के ग्रिड डिजाइन करने की आवश्यकता होती है। इसके लिए ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-3 के 1,86,405 करोड़ रुपये की योजना मंजूर की गई है। उन्होंने कहा कि योजना को वित्त वर्ष 2032-33 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

