01 October 2026

निर्देश:ईवी आज से ध्वनि प्रणाली के साथ ही बिकेंगे, पुराने ईवी CAR में भी लगाना होगा AVAS सिस्टम

निर्देश:ईवी आज से ध्वनि प्रणाली के साथ ही बिकेंगे


नई दिल्ली,  शहरों में इलेक्ट्रिक वाहनों से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और पैदल यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने एक अक्टूबर से सभी नए इलेक्ट्रिक वाहनों में ध्वनि चेतावनी प्रणाली (एवीएएस) अनिवार्य कर दी है। अब देश में वही नए इलेक्ट्रिक वाहन बेचे जा सकेंगे, जिनमें यह प्रणाली लगी होगी। पहले से सड़कों पर चल रहे पुराने इलेक्ट्रिक वाहनों में भी 1 अक्टूबर 2027 तक यह प्रणाली लगानी होगी।


सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इस संबंध में सितंबर 2025 में ही अधिसूचना जारी कर दी थी। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, एवीएएस एक ऑडियो चेतावनी प्रणाली है। इलेक्ट्रिक वाहन धीमी गति से चलते समय लगभग आवाज नहीं करते, ऐसे में यह प्रणाली कृत्रिम ध्वनि पैदा कर आसपास मौजूद पैदल यात्रियों को वाहन की मौजूदगी का संकेत देती है।

50 किमी की रफ्तार तक निकलेगी आवाज : यह प्रणाली वाहन की गति के अनुसार काम करेगी। 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक की रफ्तार पर एवीएएस अपने आप चेतावनी वाली आवाज पैदा करेगा। इससे अधिक गति होने पर यह प्रणाली अपने आप बंद हो जाएगी, क्योंकि उस गति पर टायरों के सड़क से घर्षण की प्राकृतिक आवाज सुनाई देने लगती है। नए नियम के दायरे में कार और बस जैसे श्रेणी-एम वाहन, वाणिज्यिक मालवाहक श्रेणी-एन वाहन के साथ ई-रिक्शा और ई-कार्ट भी शामिल हैं।

यानी अलग-अलग श्रेणी के इलेक्ट्रिक वाहनों में पैदल यात्रियों को चेतावनी देने वाली यह व्यवस्था जरूरी होगी।

प्रति वाहन 1,500 से 3,500 रुपये तक खर्च : सड़क परिवहन मंत्रालय के वाहन आंकड़ों के अनुसार, देश में पंजीकृत इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या 86 लाख से अधिक हो चुकी है। एवीएएस में ध्वनि पैदा करने वाला उपकरण और पानी से सुरक्षित स्पीकर जैसी व्यवस्था शामिल होगी। इसे बड़े पैमाने पर लगाने पर प्रति वाहन करीब 1,500 से 3,500 रुपये तक अतिरिक्त खर्च आने का अनुमान है। हालांकि, इसका ग्राहकों की जेब पर बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है।


पुराने ईवी में भी लगाना होगा

नियम केवल नए वाहनों तक सीमित नहीं है। देश में पहले से पंजीकृत और सड़कों पर चल रहे पुराने इलेक्ट्रिक वाहनों में भी 1 अक्टूबर 2027 तक एवीएएस लगाना अनिवार्य होगा। वाहन कंपनियों को भी उत्पादन जारी रखने के लिए इस प्रणाली की व्यवस्था करनी होगी।