उत्तर प्रदेश में परिषदीय शिक्षकों के प्रमोशन की प्रक्रिया चल रही है लेकिन प्रमोशन में वरिष्ठता सूची (seniority list) का विवाद गहराने लगा है। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियमावली 1981 के तहत वरिष्ठता निर्धारण के लिए मौलिक नियुक्ति की तिथि को आधार बनाए जाने का प्रावधान है।
हालांकि कौशाम्बी समेत कुछ जिलों में वरिष्ठता निर्धारण के लिए शिक्षकों की विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने की तिथि को आधार बनाया जा रहा है। नियमों की अनदेखी से भविष्य में अनावश्यक विवाद एवं न्यायिक मुकदमें होना तय है। शिक्षकों के सेवा मामलों के जानकार अतुल द्विवेदी का कहना है कि पदोन्नति के लिए वरिष्ठता सूची मौलिक नियुक्ति तिथि के आधार पर बनाई जानी चाहिए न कि कार्यभार ग्रहण करने की तिथि को। प्रयागराज, मैनपुरी समेत अधिकांश जिलों में मौलिक नियुक्ति तिथि के आधार पर ही सूची बनाई जा रही है। कौशाम्बी सहित अन्य जिलों में गड़बड़ी के कारण पूरी प्रक्रिया बाधित होने की आशंका है।
उदाहरण के तौर पर यदि किसी शिक्षक का नियुक्ति आदेश एक मई को जारी हुआ हो और उसने नियुक्ति आदेश में निर्धारित समय के भीतर पांच मई को विद्यालय में कार्यभार ग्रहण किया हो, तो उसकी वरिष्ठता एक मई से निर्धारित होनी चाहिए लेकिन कुछ जिलों में पांच मई को आधार बनाया जा रहा है।
उच्च प्राथमिक के प्रधानाध्यापकों की सूची पर विवाद
परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक के पद पर पदोन्नति के लिए प्रयागराज में तैयार सूची को लेकर भी विवाद है। विज्ञान और गणित विषय के 29334 सहायक अध्यापकों के तहत सितंबर 2015 में नियुक्त सीधी भर्ती के शिक्षकों से ऊपर 2016 में पदोन्नत और अंतर जनपदीय तबादले से आए उच्च प्राथमिक के सहायक अध्यापकों और प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को रख दिया गया है। यही नहीं वरिष्ठता सूची प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक पद पर मिली प्रथम नियुक्ति तिथि के आधार पर बना दी हैं जबकि सूची उच्च प्राथमिक में सहायक अध्यापक या प्राथमिक में प्रधानाध्यापक के पद पर पदोन्नति तिथि को आधार बनाना चाहिए। प्रयागराज, सुल्तानपुर, बाराबंकी आदि जिलों की वरिष्ठता सूची में इसी प्रकार की गड़बड़ी है जबकि मैनपुरी, मऊ, कौशाम्बी आदि जिलों में सूची सही बनी है।
429 परिषदीय अध्यापकों का वेतन रोकने की चेतावनी
उधर, ‘प्रशस्त 2.0’ ऐप पर निर्धारित संवेदीकरण वीडियो अभी तक नहीं देखने वाले 429 परिषदीय अध्यापकों को वेतन रोकने की चेतावनी दी गई है। प्रयागराज के बीएसए अनिल कुमार ने छह नवंबर के पत्र में लिखा है कि कई पत्रों और राज्य परियोजना कार्यालय के निर्देशों के बावजूद स्थिति असंतोषजनक है। प्रशस्त पोर्टल की छह नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, जिले के परिषदीय विद्यालयों के 429 अध्यापक अभी भी वीडियो देखने से वंचित हैं। इनमें से कुछ का स्टेटस ‘पेंडिंग’ और कुछ का ‘इन-प्रोसेस’ है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि अगर निर्धारित तिथि तक वीडियो नहीं देखने वाले अध्यापक का वेतन रोकने की कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी। इसके बाद भी रुचि नहीं ली गई तो इसे नियोक्ता के आदेश की अवहेलना मान दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। नोटिस में बहादुरपुर, बहरिया, भगवतपुर, झूंसी, कोरांव, मांडा, फूलपुर, प्रतापपुर, सहसों, सैदाबाद, शंकरगढ़, सोरांव, शृंग्वेरपुर और उरुवा सहित विभिन्न ब्लॉकों के अध्यापकों की सूची शामिल है। सभी निजी सहायता प्राप्त, वित्तविहीन स्कूल के प्रबंधकों को सभी शिक्षकों से वीडियो दिखवाने के निर्देश दिए हैं।

