खुलासा:- गिरोह ने लखनऊ में छपवाए थे पर्चे, एसटीएफ की पड़ताल में पर्चा लीक की साजिश से जुड़े कई राज उजागर


टीईटी का पर्चा लीक कराने के मामले में एसटीएफ ने कुछ और नये खुलासे किए हैं। अब पता चला है कि कैसरबाग में रुके गिरोह के दो सदस्यों ने साल्चरों को व्हाटसएप पर सवाल और उनके जवाब भेजे। फिर दोनों ने चारबाग में एक ट्रैवेल एजेन्सी के दफ्तर से इन सवालों को प्रिन्ट कराया।


इस एजेन्सी को यह नहीं पता था कि टीईटी का पर्चा है। उसे गिरोह के सदस्य ने बताया कि उसके बेटे के स्कूल का काम है। इस दुकान के कर्मचारी से भी पूछताछ की गई है। इन नई जानकारियों से जुड़े कई तथ्यों को पता करने के लिये एसटीएफ ने गाजीपुर थाने से जेल भेजे गये आरोपियों के लखनऊ जेल में फिर बयान लिये।

सवाल-जवाब लिखकर व्हाटस ऐप कियाः पड़ताल में ही सामने आया किटीईटी का पर्चा कई सेट में बना था। लिहाज़ा सवाल के क्रम के हिसाब से जवाब नहीं तैयार किये गये। पर्चा लीक कराकर साल्वर को दिया गया। फिर
कुछ लोगों ने सवाल और उनके जवाब कागज पर लिखे। इंग्लिश और गणित के कई सवाल लैपटाप पर टाइप भी किये गये। इसके बाद ही इनका प्रिन्ट आउट निकलवाया गया। इसे कैसरबाग स्थित एक होटल में रुके साल्वर व गिरोह के सदस्यों तक पहुंचाया गया। फिर यहां से ही व्हाटसएप कर लखनऊ के आस पास जलों तक पहुंचाया गया। एसटीएफ के एक अधिकारी ने बताया कि पर्चे ए, बी, सी, डी... सेट में बने थे। लिहाजा क्रमांक के साथ जवाब तैयार कर भेजना सम्भव नहीं था। किस अभ्यर्थी के पास कौन सा सेट पहुंचता, यह नहीं पता हो सकता था। इसलिये ही सवाल और जवाब व्हाटसएप किये गये। सेट कोई भी होता, सवाल आगे पीछे यहीं होते।

एसटीएफ के एक अधिकारी ने बताया कि गिरोह के सदस्य लखनऊ में परीक्षा से चार दिन पहले यानी 24 नवम्बर को ही आ गये थे।


प्रश्नपत्र की सात प्रतियां करायी थी आरोपियों ने
एसटीएफ को लखनऊ में रुके गिरोह के सदस्यों अनुराग, फौजदार वर्मा, कौशलेन्द्र प्रताप और चन्दू वर्मा ने कुबूला था कि लीक पर्चे की सात प्रतियां करायी गई थी। पर्चा चार लाख रुपये में खरीदा था। इसे 50-60 अभ्यर्थियों को देने के लिये सम्पर्क भी कर लिया था। इन लोगों ने अभ्यर्थियों को 40 से 50 हजार रुपये में पर्चा बेचना तय किया था। पर, ये लोग सुबह ही पालीटेक्निक चौराहे के पास पकड़ लिये गये थे। ये चारों लखनऊ जेल में बंद है। जल्दी ही इन्हें रिमाण्ड पर लिया जायेगा।