बेसिक शिक्षा विभाग में करीब तीन साल पहले हुए करोड़ों रुपये के खेल किट घोटाले मामले में विजिलेंस तत्कालीन बीएसए की भूमिका तलाशने में जुटी है। विजिलेंस ने कई शिक्षकों के बयान भी दर्ज किए हैं। इस आधार पर अब आगे कार्रवाई की जा रही है।
चहेती फर्म से खरीदी गई खेल सामग्री
शासन ने प्रत्येक प्राथमिक विद्यालय के लिए पांच हजार और हर उच्च प्राथमिक विद्यालय के लिए 10-10 हजार की दर से धनराशि उपलब्ध कराई थी। इससे बच्चों के लिए खेल सामग्री की खरीदी होनी थी। महानिदेशक ने 15 मार्च 2022 को प्रेरणा एप पोर्टल पर सामग्री अपलोड करने के निर्देश दिए। यह राशि सभी विद्यालय के खातों में भेजी गई लेकिन आरोप है कि तत्कालीन बीएसए वेदराम ने खंड शिक्षा अधिकारियाें के जरिये स्कूल प्रधानाध्यापकों पर दबाव बनाते हुए अपनी चहेती फर्म से खेल सामग्री की खरीद कराई। कई प्रधानाध्यापकों का कहना है कि बीसएस के दबाव में आकर उन्होंने बताई गई फर्म से ही खेल किट की खरीद की। करोड़ों रुपये से खेल किट खरीदा गया। इनकी गुणवत्ता भी घटिया निकली। इस वजह से इनका इस्तेमाल नहीं हो सका। यह सारी खेल किट बीएसए की चहेती फर्म से ही खरीदे गए थे।
प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष ने की थी शिकायत
यह मामला सामने आने के बाद प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष जितेंद्र दीक्षित ने विजिलेंस में शिकायत की। शासन के निर्देश पर विजिलेंस ने इस मामले की छानबीन शुरू की। इस खरीद प्रक्रिया से जुड़े कई शिक्षकों के बयान भी दर्ज कराए जा चुके हैं। इस मामले में खास तौर से बीएसए की भूमिका तलाशी जा रही है। वहीं, एसपी विजिलेंस राजेंद्र यादव का कहना है कि अभी आरोपों की जांच चल रही है।

