26 April 2026

अंतिम सफर: "भैया आज जल्दी स्कूल पहुँच जाएंगे..." कहते ही थम गईं सहायक अध्यापिका की सांसें

अंतिम सफर: "भैया आज जल्दी स्कूल पहुँच जाएंगे..." कहते ही थम गईं शिक्षिका अर्चना की सांसें

चंदौसी (संभल)। कर्तव्य के प्रति समर्पण और नियति की क्रूरता का एक हृदयविदारक उदाहरण चंदौसी में देखने को मिला। कुढ़फतेहगढ़ क्षेत्र के गांव काजीवाला स्थित प्राथमिक विद्यालय में तैनात सहायक अध्यापिका अर्चना कुमारी (48) का गुरुवार सुबह स्कूल जाते समय दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। विडंबना देखिए कि जिस वक्त उनकी सांसें थमीं, उसके कुछ सेकंड पहले ही वह समय पर स्कूल पहुँचने की खुशी जाहिर कर रही थीं।

फाटक खुला देख झलकी थी मुस्कान

वैन चालक पप्पू के अनुसार, गुरुवार सुबह करीब 6:30 बजे वह अर्चना जी और अन्य शिक्षिकाओं को लेकर स्कूल जा रहा था। जब वैन चंदौसी के रेलवे फाटक के पास पहुँची, तो फाटक खुला हुआ था। इसे देखकर अर्चना बेहद खुश हुईं और चालक से बोलीं— "भैया आज तो हम स्कूल जल्दी पहुँच जाएंगे, फाटक खुला मिल गया।" यह वाक्य पूरा होते ही अर्चना अचानक अचेत होकर गिर पड़ीं। चालक और अन्य शिक्षिकाएं उन्हें तुरंत निजी अस्पताल ले गए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित करते हुए मौत की वजह 'हार्ट अटैक' बताई।

गाजियाबाद से संभल तक का सफर

मूल रूप से गाजियाबाद के वैशाली नगर की रहने वाली अर्चना कुमारी की नियुक्ति वर्ष 2020 में प्राथमिक विद्यालय काजीवाला में हुई थी। उनके पति महावीर सिंह दिल्ली में एक निजी बैंक में कार्यरत हैं। अर्चना नौकरी के चलते चंदौसी की विकास नगर कॉलोनी में किराये पर रहकर बच्चों का भविष्य संवार रही थीं।

बीआरसी परिसर में दी गई विदाई

शिक्षिका की असामयिक मृत्यु की खबर फैलते ही शिक्षा विभाग में शोक की लहर दौड़ गई। साथी शिक्षक अस्पताल पहुँचे और उनके पार्थिव शरीर को मौलागढ़ स्थित बीआरसी (BRC) परिसर ले जाया गया, जहाँ उन्हें नम आंखों से विदाई दी गई। परिजनों के पहुँचने के बाद शव उन्हें सौंप दिया गया। शिक्षकों ने बताया कि हाल ही में उनका ट्यूमर का ऑपरेशन हुआ था, लेकिन हृदय संबंधी किसी बीमारी की जानकारी उन्हें नहीं थी।