कार्यमुक्त अग्निवीरों को उच्च शिक्षा और रोजगार में मिलेगी प्राथमिकता
नई दिल्ली। केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना के तहत सेना में भर्ती हुए अग्निवीरों के पहले बैच के कार्यमुक्त होने की तैयारी शुरू हो गई है। सरकार अब ऐसे अग्निवीरों को उच्च शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है। इसके तहत कार्यमुक्त अग्निवीरों को उच्च शिक्षा में प्राथमिकता और उनके सैन्य अनुभव के आधार पर विशेष क्रेडिट देने की योजना बनाई गई है।
जानकारी के अनुसार, अग्निवीरों को चार वर्ष की सेवा के दौरान प्राप्त अनुभव और कौशल के आधार पर अकादमिक क्रेडिट प्रदान किए जाएंगे। इन क्रेडिट्स की मदद से वे आगे की पढ़ाई जारी रख सकेंगे। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि तकनीकी सेवाओं में कार्य करने वाले अग्निवीरों को इसका सबसे अधिक लाभ मिलेगा, क्योंकि उन्हें इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग और तकनीकी कार्यों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होता है।
सरकार का मानना है कि यदि कोई अग्निवीर सेना से कार्यमुक्त होने के बाद उच्च शिक्षा प्राप्त कर नया करियर बनाना चाहता है, तो यह व्यवस्था उसके लिए काफी उपयोगी साबित होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे अग्निवीरों को नई शिक्षा नीति के अनुरूप कौशल आधारित शिक्षा और रोजगार के अवसर मिल सकेंगे।
बताया जा रहा है कि इस वर्ष करीब 50 हजार अग्निवीर कार्यमुक्त होंगे। इनमें से लगभग 25 प्रतिशत को सेना में स्थायी नियुक्ति दी जाएगी, जबकि शेष अग्निवीरों को अन्य क्षेत्रों में रोजगार या उच्च शिक्षा के विकल्प तलाशने होंगे। केंद्र और राज्य सरकारों ने सार्वजनिक उपक्रमों, सरकारी कंपनियों तथा सुरक्षा बलों में अग्निवीरों को प्राथमिकता देने की घोषणाएं भी की हैं।
गृह मंत्रालय ने कार्यमुक्त अग्निवीरों के लिए पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य करने की तैयारी की है, ताकि उन्हें विभिन्न रोजगार अवसरों से जोड़ा जा सके। इसके अलावा कई राज्य पुलिस बलों और अर्धसैनिक बलों में भी अग्निवीरों के लिए आरक्षण और प्राथमिकता की व्यवस्था लागू की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अग्निवीरों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के साथ-साथ युवाओं को कौशल और अनुशासन आधारित करियर की ओर प्रेरित करेगा।

