नियुक्ति, स्थानांतरण और समायोजन व्यवस्था पर शिक्षक नेता का सुझाव, शिक्षकों और अभ्यर्थियों के लिए रखा वैकल्पिक मॉडल
लखनऊ।
उत्तर प्रदेश में शिक्षक नियुक्ति, स्थानांतरण और समायोजन को लेकर लंबे समय से चल रही समस्याओं के बीच एक वैकल्पिक मॉडल चर्चा का विषय बना हुआ है। शिक्षक हितों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता एवं पूर्व अधिवक्ता अनुराग सिंह ने एक ऐसी व्यवस्था का सुझाव दिया है, जिसके माध्यम से भर्ती, स्थानांतरण और समायोजन संबंधी अधिकांश विवादों को समाप्त करने का दावा किया गया है।
प्रस्तावित मॉडल में शिक्षक भर्ती को आवश्यकता आधारित बनाने, स्थानांतरण के लिए स्थायी वरिष्ठता सूची तैयार करने तथा सेवा अवधि के अनुसार शिक्षकों को उनके गृह जनपद या निकटवर्ती क्षेत्रों में अवसर देने की बात कही गई है।
प्रस्ताव के प्रमुख बिंदु
1. आवश्यकता वाले जिलों में ही भर्ती
सुझाव के अनुसार शिक्षक भर्ती उन्हीं जिलों में की जाए जहां वास्तविक रूप से रिक्त पद और आवश्यकता अधिक हो। प्रत्येक जिले में समान रूप से भर्ती निकालने के बजाय आवश्यकता आधारित नियुक्ति प्रणाली लागू की जाए।
2. स्थानांतरण के लिए स्थायी वरिष्ठता सूची
जो शिक्षक दूसरे जिले में स्थानांतरण चाहते हैं, उनके लिए एक स्थायी वरिष्ठता सूची बनाई जाए। जैसे-जैसे रिक्तियां उपलब्ध हों, वरिष्ठता के आधार पर उन्हें स्थानांतरित किया जाए।
3. रिक्त पद वाले जिलों से ही नई भर्ती
प्रस्ताव में कहा गया है कि जिन जिलों में स्थानांतरण के बाद रिक्त पद बढ़ जाएं, वहां नई भर्ती निकाली जाए, जिससे पदों की पूर्ति समय पर हो सके।
4. दुर्गम क्षेत्रों में प्राथमिक नियुक्ति
नई नियुक्तियों को पहले दुर्गम एवं दूरस्थ क्षेत्रों में तैनात किया जाए। साथ ही महिलाओं और दिव्यांग शिक्षकों को विशेष प्राथमिकता देने का सुझाव भी दिया गया है।
5. अधिकतम सेवा अवधि तय करने की मांग
प्रत्येक ब्लॉक या क्षेत्र में शिक्षकों के लिए अधिकतम सेवा अवधि निर्धारित करने का प्रस्ताव रखा गया है। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद उन्हें चरणबद्ध तरीके से निकटवर्ती क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जाए।
6. 7 से 10 वर्ष बाद पुनः स्थानांतरण
मॉडल में यह भी सुझाव दिया गया है कि 7 से 10 वर्ष की सेवा के बाद शिक्षकों को उनके गृह जनपद या शहर के निकटतम ब्लॉक में नियुक्ति का अवसर दिया जाए।
बताए गए संभावित लाभ
प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि इस व्यवस्था से—
- बेरोजगार अभ्यर्थियों को नियमित रोजगार के अवसर मिलेंगे।
- शिक्षकों को समय के साथ गृह जनपद के निकट कार्य करने का अवसर मिलेगा।
- समायोजन की आवश्यकता स्वतः कम हो जाएगी।
- विद्यालयों में शिक्षक-छात्र अनुपात (PTR) बेहतर तरीके से संतुलित हो सकेगा।
- दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
- दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों को अतिरिक्त HRA या विशेष भत्ता देने की व्यवस्था भी की जा सकती है।
आधिकारिक नीति नहीं
हालांकि यह प्रस्ताव फिलहाल किसी सरकारी नीति या शासनादेश का हिस्सा नहीं है, बल्कि एक सुझावात्मक मॉडल है। नियुक्ति, स्थानांतरण और समायोजन से संबंधित अंतिम निर्णय राज्य सरकार और शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित नियमों एवं नीतियों के अनुसार ही लिए जाएंगे।
शिक्षक संगठनों और अभ्यर्थियों के बीच इस प्रकार के सुझावों पर चर्चा जारी है, वहीं शिक्षा विभाग की आगामी नीतियों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

