नई दिल्ली, एजेंसी। आयकर रिटर्न दाखिल करने वाले करदाताओं के लिए इस साल एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। आकलन वर्ष 2026-27 के लिए आयकर विभाग ने सभी आईटीआर फॉर्म में दूसरे पते का कॉलम अनिवार्य कर दिया है। अब करदाताओं को अपने प्राथमिक पते के साथ-साथ एक अतिरिक्त पते की जानकारी भी देनी होगी। यदि दोनों पते एक जैसे हों, तब भी इसकी पुष्टि करना आवश्यक होगा।
इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य आयकर विभाग के रिकॉर्ड को अधिक सटीक बनाना और करदाताओं से संपर्क को सुगम बनाना है। पहले आईटीआर फॉर्म में केवल एक पता भरना अनिवार्य था, लेकिन अब फॉर्म में प्राथमिक और द्वितीयक, दोनों पतों का विकल्प दिया गया है। यदि करदाता का दूसरा पता नहीं है तो वह 'दूसरा पता पहले पते के समान है' का विकल्प चुन सकता है। वहीं, यदि वह किसी दूसरे शहर में रहता है या उसका पत्राचार पता अलग है, तो उसे उस पते का पूरा विवरण देना होगा।
यह व्यवस्था उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगी जो नौकरी या व्यवसाय के कारण अपने स्थायी पते से अलग शहर में रहते हैं। उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति का स्थायी पता जयपुर में है, लेकिन वह नौकरी के कारण गुरुग्राम में किराये के मकान में रहता है, तो वह दोनों पते दर्ज कर सकेगा।
मकान किराया भत्ते के सत्यापन में भी मिलेगी मदद
कर विशेषज्ञों का मानना है कि नया प्रावधान मकान किराया भत्ते के दावों की जांच को भी आसान बनाएगा। यदि कोई कर्मचारी किराये के मकान के आधार पर कर छूट का दावा करता है, तो विभाग उसके दिए गए पते का आसानी से सत्यापन कर सकेगा। इससे गलत दावों पर लगाम लगेगी और वास्तविक दावों का जल्दी निपटारा होगा।
करदाताओं के लिए सलाह
विशेषज्ञों का सुझाव है कि आईटीआर भरते समय दोनों पतों की जानकारी सावधानीपूर्वक दर्ज करें। यदि हाल ही में पता बदला है तो आयकर पोर्टल पर उसे अपडेट जरूर करें। सही पता, मोबाइल नंबर और ई-मेल दर्ज करने से रिफंड, नोटिस या कर संबंधी संचार में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह नया प्रावधान करदाताओं पर अतिरिक्त बोझ डालने के बजाय आयकर प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सटीक और सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उल्लेखनीय है कि आईटीआर भरने की अंतिम तिथि नजदीक है और अभी केवल 11 दिन शेष हैं, इसलिए करदाता समय से पूरी जानकारी के साथ रिटर्न दाखिल करें।

