लखनऊ। परिषदिय विद्यालयों में छात्र संख्या बढ़ाने और आउट ऑफ स्कूल बच्चों को फिर से स्कूल से जोड़ने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने नई पहल शुरू की है। अब डीएलएड और बीटीसी प्रशिक्षुओं की मदद से ऐसे बच्चों की खोज की जाएगी जो अभी तक स्कूल नहीं पहुंच पाए हैं। 14 अगस्त तक विशेष अभियान चलाकर इन बच्चों को चिह्नित कर उनके स्कूल में प्रवेश की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए प्रशिक्षुओं को प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी।
बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। आदेश में कहा गया है कि सरकारी व निजी संस्थानों में चल रहे डीएलएड और बीटीसी पाठ्यक्रमों के प्रशिक्षुओं को इस अभियान से जोड़ा जाए। वर्तमान में परिषदिय विद्यालयों में करीब 1.48 करोड़ बच्चे पढ़ रहे हैं और अभियान के जरिए इनकी संख्या बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
डीएलएड व बीटीसी प्रशिक्षुओं की दो बड़ी जिम्मेदारियां तय की गई हैं। पहली, वे मजदूरों व वंचित वर्ग के बीच जाकर उनके स्कूल न जाने वाले बच्चों की सूची तैयार करेंगे। दूसरी, इन बच्चों की उम्र के अनुसार उन्हें उपयुक्त कक्षा में नामांकित कराने में मदद करेंगे। जिन बच्चों ने बीच में पढ़ाई छोड़ दी है, उन्हें दोबारा स्कूल से जोड़ा जाएगा।
अभियान को गति देने के लिए प्रोत्साहन राशि
आउट ऑफ स्कूल बच्चों को चिन्हित कर प्रवेश दिलाने पर प्रत्येक छात्र के बदले प्रशिक्षुओं को 10 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। महानिदेशक स्कूल शिक्षा की ओर से सभी जिलों के डायट प्राचार्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बेसिक शिक्षा अधिकारियों और खंड शिक्षा अधिकारियों के साथ समन्वय कर अभियान की निगरानी करें और अधिक से अधिक बच्चों का दाखिला सुनिश्चित कराएं।
निर्देश में यह भी कहा गया है कि जिन परिवारों में बच्चे मजदूरी या घरेलू कार्यों में लगे हैं, उन्हें प्रेरित कर बच्चों को स्कूल भेजने के लिए जागरूक किया जाए। विभाग का लक्ष्य है कि किसी भी योग्य आयु वर्ग का बच्चा स्कूल से बाहर न रहे और परिषदिय विद्यालयों में शत‑प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित हो सके।

