03 September 2026

हौसलों के पहियों पर बैठकर स्कूल जाएगी रागिनी

 

बलिया की बेटी रागिनी की मदद के लिए अब समाज के अलग-अलग वर्गों से सहयोग के हाथ बढ़ने लगे हैं। रागिनी के संघर्ष और उसके सपनों को नई उड़ान देने के लिए अलख सर ने ₹10 लाख की आर्थिक मदद देने की घोषणा की है।


अलख सर की इस पहल को मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल माना जा रहा है। उनकी इस मदद से रागिनी के इलाज, कृत्रिम पैर और आगे की जरूरतों को पूरा करने में काफी सहारा मिलेगा।


रागिनी के लिए लगातार सामने आ रही मदद की पहल यह संदेश दे रही है कि मुश्किल परिस्थितियां चाहे जितनी बड़ी हों, अगर समाज साथ खड़ा हो जाए तो किसी की जिंदगी को नई दिशा दी जा सकती है।

Balia News: मनियर, हिन्दुस्तान संवाद। ब्लॉक के दिघेड़ा ग्रामसभा के रानीपुर गांव निवासी देवेन्द्र राजभर की बेटी सात वर्षीय रागिनी के स्कूल जाने में अब पैर की दिव्यांगता बाधक नहीं बनेगी। बुधवार को रानीपुर पहुंचे डीएम मंगला प्रसाद सिंह ने उसके सपनों में जान फूंकते हुए उसे दो ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई। स्कूल बैग और कॉपी किताब के साथ ही चॉकलेट देने के साथ ही परिवार को आश्वस्त भी किया कि रागिनी की पढ़ाई में किसी प्रकार की बाधा नहीं आने दी जाएगी। सरकार की ओर से उपलब्ध सभी जरूरी सुविधाएं और हरसंभव सहायता बच्ची को दिलाई जाएगी। डीएम ने रागिनी की मेडिकल जांच कराने के भी निर्देश दिए। कहा कि बच्ची के पैर की समस्या का उचित उपचार कराने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा। रागिनी के घर से स्कूल तक जाने वाली सड़क को भी जल्द ठीक कराने को कहा।



 रागिनी की प्रेरणा

मां बबिता के साथ इलाज कराकर लौटते समय बचपन में ही रागिनी का पैर खराब हो गया था। अन्य बच्चों की तरह रागिनी का भी बालमन स्कूल जाने को हुआ तो पैर की दिव्यांगता बाधा बनी। इसके बावजूद घर से करीब चार सौ मीटर दूर प्रावि दिघेड़ा तक वह एक पैर के सहारे ही कूद-कूदकर आने-जाने लगी। मजदूरी के सहारे गृहस्थी चलाने वाले पिता के लिए ट्राईसाइकिल खरीदना या कृत्रिम पैर लगवाना संभव नहीं था। स्कूल जाती रागिनी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसमें वह गुहार लगा रही है कि ‘डीएम अंकल मुझे साइकिल दिला दीजिए, मैं पढ़ने जाऊंगी।’ मामला संज्ञान में आने पर बुधवार को डीएम अचानक उसके गांव पहुंच गए। उनके साथ बीएसए मनीष कुमार सिंह भी थे। डीएम ने परिजनों से मुलाकात की और पूरी जानकारी ली। रागिनी को दुलारते हुए आत्मीयता से बातचीत की। उसकी जरूरतों तथा पढ़ाई के संबंध में पूछा। अपने हाथों से उसे किताबें और अन्य सामग्री प्रदान की। आने-जाने में परेशानी न हो, इसके लिए डीएम ने उसे दो ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराई।


 गांव की सड़क भी जल्द बनाने के निर्देश

रागिनी के घर पहुंचे डीएम मंगला प्रसाद सिंह ने रागिनी की मां बबिता को बताया कि परिवार में शौचालय निर्माण के लिए धनराशि स्वीकृत हो चुकी है। रागिनी के गांव की खराब सड़क की स्थिति देख डीएम ने कड़ी नाराजगी जताई। सम्बंधित अधिकारियों को सड़क की स्थिति में जल्द सुधार कराने के निर्देश दिए। रागिनी के घर से स्कूल जाने वाले जर्जर मार्ग का इस्टीमेट तैयार कर भेजने का निर्देश बीडीओ, प्रधान व सचिव को दिया। दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी को निर्देश दिए कि गांव में कैम्प लगाकर दिव्यांगों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराएं। इस दौरान बीएसए मनीष कुमार सिंह, डीपीआरओ अवनीश कुमार श्रीवास्तव, बीडीओ डॉ शत्रुघ्न सिंह आदि थे।


एक किमी पैदल चले डीएम, रागिनी बोली ‘अंकल, मत जाइए’

मनियर। एक पैर के सहारे कूद-कूदकर स्कूल जाती सात वर्षीय रागिनी का वीडियो वायरल होने के बाद रानीपुर गांव पहुंचे डीएम के लिए भी बेटी के घर तक जाने की राह आसान नहीं थी। मनियर-बलिया मार्ग पर अपना वाहन छोड़कर करीब एक किमी तक कीचड़ भरे रास्ते पर पैदल चल डीएम रागिनी के घर पहुंचे। सभी जरूरी सामान उपलब्ध कराने के बाद डीएम ने बच्ची से उसकी जरूरतें पूछीं। रागिनी ने कहा कि अब उसे और कुछ नहीं चाहिए। उसकी स्पष्ट बातों से प्रभावित डीएम ने कहा कि बच्ची बेहद होनहार है और भविष्य में काफी आगे बढ़ेगी। डीएम जाने को हुए तो रागिनी ने भावुक होकर डीएम से कहा ‘अंकल मत जाइए।’ वहां मौजूद लोग भी भावुक हो गए।


जांच कर हायर सेंटर भेजने की सलाह

अपने साथ मौजूद सीएमओ डॉ. अभय नारायण राय से डीएम ने बच्ची के पैर के बारे में जानकारी ली। उसकी जांच कराने के बाद हायर सेंटर भेजने के निर्देश दिए। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुराग सिंह ने बताया कि पैर काफी समय से टूटा होने के कारण इसे जोड़ना संभव नहीं है, हालांकि जांच कराई जाएगी। बच्ची को वाहन से बलिया ले जाकर जांच कराने की जिम्मेदारी पीएचसी मनियर प्रभारी डॉ. दिग्विजय कुमार को दी गई।