03 September 2026

आदेश : डीएम के वेतन से पांच लाख का मुआवजा दें

 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा एवं सामाजिक कार्यकर्ता आकृति चौधरी को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने आकृति की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत निरुद्धि सहित पूरी कार्यवाही रद्द कर दी है। साथ ही अदालत ने उन्हें 5 लाख रुपये मुआवजा दिए जाने का आदेश दिया है। न्यायालय ने यह राशि गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम के वेतन से अदा किए जाने का निर्देश दिया है।



यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की पीठ ने आकृति चौधरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। याची के अधिवक्ता चार्ली प्रकाश के अनुसार कोर्ट ने खुली अदालत में यह आदेश लिखाया। अधिवक्ता चार्ली के अनुसार सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार से आकृति चौधरी को रासुका के तहत निरुद्ध किए जाने के आधार और पुलिस कार्रवाई के समर्थन में उपलब्ध साक्ष्य एवं दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा था। सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने पक्ष रखा। अदालत के समक्ष उपलब्ध सामग्री पर विचार करने के बाद न्यायालय ने पाया कि एनएसए के तहत निरुद्ध करने की कार्रवाई को उचित ठहराने के लिए पर्याप्त आधार प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसके बाद हाईकोर्ट ने निरुद्धि को निरस्त कर दिया।


मामले की पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा था कि आकृति चौधरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने से पहले क्या उन्हें शांतिभंग की आशंका के संबंध में कोई नोटिस जारी किया गया था। अदालत ने कथित रूप से मजदूरों को भड़काने वाले वीडियो और व्हाट्सएप चैट से संबंधित जानकारी और सामग्री भी सरकार से मांगी थी। इन आरोपों के समर्थन में अपेक्षित साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने को लेकर भी न्यायालय ने सरकार से जवाब मांगा था।


सुप्रीम कोर्ट के बाद हाईकोर्ट पहुंची थीं आकृति


इससे पूर्व ग्रेटर नोएडा की सत्र अदालत द्वारा आकृति चौधरी की चार में से तीन जमानत अर्जियां खारिज किए जाने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। एक मामले में उन्हें राहत मिली थी। सुप्रीम कोर्ट ने सीधे जमानत देने के बजाय हाईकोर्ट जाने की सलाह दी थी।