शिक्षकों की ज्येष्ठता पर महत्वपूर्ण चर्चा: नियुक्ति के बाद आरक्षण नहीं, लागू सेवा नियमों के अनुसार तय होगी वरिष्ठता; पदोन्नति में मेरिट की भूमिका अहम
UP Teacher Seniority News: सरकारी सेवाओं में आरक्षित और अनारक्षित श्रेणी के कर्मचारियों की आपसी ज्येष्ठता (Seniority) निर्धारित करने को लेकर नियुक्ति की तिथि, चयन सूची में मेरिट क्रम और पदोन्नति के नियम महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उत्तर प्रदेश में शिक्षकों की नियुक्ति एवं पदोन्नति से जुड़े मामलों में भी ज्येष्ठता निर्धारित करने के लिए संबंधित सेवा नियमों का पालन करना आवश्यक है।
इस विषय पर एक महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत यह है कि कर्मचारियों की आपसी ज्येष्ठता का निर्धारण केवल उनकी आरक्षित या अनारक्षित श्रेणी देखकर नहीं किया जा सकता। इसके लिए यह देखना होता है कि नियुक्ति किस प्रक्रिया के तहत हुई, संबंधित सेवा नियम क्या कहते हैं और पदोन्नति के लिए कौन-से मानदंड निर्धारित हैं।
नियुक्ति के बाद कैसे निर्धारित होती है ज्येष्ठता?
उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक ज्येष्ठता नियमावली, 1991 में ज्येष्ठता निर्धारित करने के अलग-अलग प्रावधान हैं। इन नियमों के अनुसार, ज्येष्ठता तय करने का तरीका नियुक्ति के स्रोत और लागू सेवा नियमों पर निर्भर करता है।
नियम 5 के तहत एक ही चयन प्रक्रिया के माध्यम से सीधी भर्ती में नियुक्त अभ्यर्थियों की आपसी ज्येष्ठता सामान्यतः आयोग या चयन समिति द्वारा तैयार की गई मेरिट सूची के क्रम के अनुसार निर्धारित होती है।
वहीं, पदोन्नति के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों की ज्येष्ठता के लिए नियम 6 और नियम 7 में अलग-अलग व्यवस्थाएं दी गई हैं। एक ही संवर्ग से पदोन्नति होने और अलग-अलग संवर्गों से पदोन्नति होने की परिस्थितियों में ज्येष्ठता निर्धारण का तरीका अलग हो सकता है।
इसलिए सीधी भर्ती की मेरिट सूची और पदोन्नति की वरिष्ठता को एक ही नियम से निर्धारित मानना सही नहीं होगा।
क्या आरक्षित वर्ग के कर्मचारी की ज्येष्ठता हमेशा अधिक होगी?
नहीं। केवल आरक्षित श्रेणी से संबंधित होने के आधार पर किसी कर्मचारी को हर परिस्थिति में अधिक ज्येष्ठता नहीं मिल जाती।
ज्येष्ठता निर्धारित करते समय लागू सेवा नियमों, नियुक्ति की तिथि, चयन प्रक्रिया और पदोन्नति से संबंधित प्रावधानों को देखना आवश्यक है।
हालांकि, आरक्षण के आधार पर पदोन्नति तथा परिणामी ज्येष्ठता से जुड़े विशिष्ट नियम कुछ परिस्थितियों में लागू हो सकते हैं। इसलिए यह कहना भी सही नहीं होगा कि आरक्षण का ज्येष्ठता पर कभी कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
पदोन्नति में मेरिट का क्या महत्व है?
पदोन्नति की प्रक्रिया में मेरिट की भूमिका संबंधित सेवा नियमों पर निर्भर करती है। कुछ सेवाओं में पदोन्नति वरिष्ठता के आधार पर होती है, कुछ में वरिष्ठता-सह-योग्यता और कुछ में चयन अथवा मेरिट के निर्धारित मानदंड लागू होते हैं।
यदि किसी सेवा में पदोन्नति के लिए वरिष्ठता-सह-योग्यता का मानदंड निर्धारित है, तो केवल चयन गुणांक या मेरिट को निर्णायक नहीं माना जा सकता। इसी प्रकार, जहां नियमों के तहत चयन मेरिट के आधार पर होना है, वहां निर्धारित चयन मानदंडों का पालन करना आवश्यक होगा।
इसलिए शिक्षकों की पदोन्नति के मामलों में यह जानना जरूरी है कि संबंधित पद के लिए कौन-सी पदोन्नति प्रक्रिया और कौन-सा चयन मानदंड लागू है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्येष्ठता निर्धारण पर क्या कहा?
उत्तर प्रदेश में ज्येष्ठता निर्धारण से संबंधित मामलों में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सेवा नियमों के पालन पर जोर दिया है।
Rajesh Kumar Tandon बनाम State of U.P. मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 20 अक्टूबर 2021 के निर्णय में कहा कि किसी सेवा में कर्मचारियों की आपसी ज्येष्ठता संबंधित सेवा नियमों के अनुसार निर्धारित की जानी चाहिए। सामान्यतः सेवा में प्रवेश या मौलिक नियुक्ति की तिथि ज्येष्ठता तय करने का महत्वपूर्ण आधार होती है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि रिक्त पद उत्पन्न होने की तारीख मात्र से ज्येष्ठता या पदोन्नति का अधिकार नहीं मिल जाता, जब तक संबंधित नियम इसकी अनुमति न दें।
इसी तरह, सर्वोच्च न्यायालय ने Pawan Pratap Singh बनाम Reevan Singh मामले में 10 फरवरी 2011 को सेवा में ज्येष्ठता निर्धारित करने के लिए लागू नियमों के महत्व पर चर्चा की थी।
इन निर्णयों का मूल संदेश यह है कि ज्येष्ठता और पदोन्नति से जुड़े विवादों का समाधान लागू सेवा नियमों और संबंधित कानूनी प्रावधानों के आधार पर किया जाना चाहिए।
शिक्षकों के लिए क्या है इसका महत्व?
उत्तर प्रदेश के बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षकों के लिए ज्येष्ठता सूची पदोन्नति प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इसलिए किसी भी ज्येष्ठता सूची को तैयार करते समय संबंधित संवर्ग के सेवा नियमों और लागू विभागीय निर्देशों का पालन आवश्यक है।
शिक्षकों को अपनी ज्येष्ठता से संबंधित किसी विवाद की स्थिति में निम्नलिखित बिंदुओं की जांच करनी चाहिए:
मौलिक नियुक्ति की तिथि क्या है?
नियुक्ति सीधी भर्ती से हुई थी या पदोन्नति से?
संबंधित चयन प्रक्रिया में मेरिट सूची का क्या स्थान है?
संबंधित संवर्ग के लिए कौन-से ज्येष्ठता नियम लागू हैं?
पदोन्नति में वरिष्ठता, योग्यता और आरक्षण से संबंधित क्या प्रावधान हैं?
क्या इस विषय पर कोई लागू न्यायिक निर्णय या विभागीय आदेश उपलब्ध है?
सरकारी सेवाओं में ज्येष्ठता निर्धारित करने का आधार केवल आरक्षित या अनारक्षित श्रेणी नहीं है। इसके लिए नियुक्ति की प्रकृति, चयन सूची, मौलिक नियुक्ति की तिथि और संबंधित सेवा नियमों को देखना आवश्यक है।
इसी प्रकार, पदोन्नति में केवल चयन गुणांक ही निर्णायक होगा, ऐसा सार्वभौमिक नियम नहीं है। पदोन्नति का वास्तविक आधार संबंधित सेवा नियमों में निर्धारित मानदंडों से तय होगा। शिक्षकों की ज्येष्ठता और पदोन्नति से जुड़े किसी भी निर्णय में लागू नियमावली एवं न्यायालय के प्रासंगिक निर्णयों का परीक्षण आवश्यक है।
महत्वपूर्ण: यह सामान्य कानूनी जानकारी है। किसी विशिष्ट शिक्षक संवर्ग की ज्येष्ठता या पदोन्नति पर निष्कर्ष निकालने के लिए उस संवर्ग के लागू सेवा नियमों और संबंधित आदेश का परीक्षण जरूरी है।

