झांसी। दीपावली का त्योहार नजदीक है। लेकिन परिषदीय विद्यालयों में तैनात जिले के करीब 417 अनुदेशकों के परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। अक्तूबर माह का मानदेय अब तक उनके खातों में नहीं पहुंचा है। पूरे महीने विद्यालयों में बच्चों को पढ़ाने और अपनी जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद अनुदेशकों को मेहनताने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। त्योहार से ठीक पहले भुगतान अटकने से उनके घरों का बजट बिगड़ गया है।
सीमित मानदेय में परिवार का खर्च चलाने वाले अनुदेशकों के सामने दीपावली की खरीदारी, बच्चों की जरूरतें और घरेलू खर्च पूरा करना मुश्किल हो रहा है। एक ओर विभाग विद्यालयों में शिक्षण कार्य नियमित रखने की अपेक्षा करता है, वहीं दूसरी ओर महीनेभर की सेवाओं का भुगतान समय पर नहीं हो पा रहा है। परिषदीय अनुदेशक उत्थान समिति के जिलाध्यक्ष प्रिंस चौधरी ने बताया कि जिले में करीब 417 अनुदेशक कार्यरत हैं। अक्तूबर माह का मानदेय लंबित होने से सभी प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि कम मानदेय में परिवार की जिम्मेदारियां निभाना पहले ही चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में त्योहार के समय भुगतान नहीं होने से मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई अनुदेशकों की बैंक किस्तें (ईएमआई) समय पर जमा नहीं हो पा रही हैं। इससे उनके सिबिल स्कोर पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
इसके अलावा वीरांगना आत्मरक्षा प्रशिक्षण कराने वाले अनुदेशकों का मानदेय भी लंबित है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा की ओर से 21 अक्तूबर को जारी आदेश के तहत प्रशिक्षण की ग्रांट जनपद को हस्तांतरित की जा चुकी है। कई विद्यालयों में प्रशिक्षण भी पूरा कराया जा चुका है, लेकिन उसका भुगतान नहीं हुआ है।
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सितंबर माह का मानदेय सभी अनुदेशकों को मिल गया है। अक्तूबर माह की डिमांड लगा दी गई है। लगभग एक सप्ताह में सभी का मानदेय मिल जाएगा। - जितेंद्र कुमार, बेसिक शिक्षा अधिकारी

