शिक्षकों को बीएलओ ड्यूटी के लिए न बाध्य नहीं कर सकते: न्यायाधीश

हमीरपुर। उच्च न्यायालय ने बीएसए को शिक्षकों को बीएलओ की ड्यूटी के लिए बाध्य न करने और रोके गए वेतन को जारी करने का आदेश दिया है। बीएलओ ड्यूटी में लापरवाही बरतने पर डीएम की संस्तुति पर बीएसए ने आठ शिक्षकों का वेतन रोक दिया था। मामले में दो शिक्षकों ने उच्च न्यायालय में बीएसए के आदेेश को चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश ने शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुनाया है।


इलाहाबाद उच्च न्यायालय में शिक्षक जय प्रकाश और प्रियंका साहू ने रिट दायर की थी। इसमें बताया था कि विधानसभा चुनाव के मद्देनजर उनकी ड्यूटी बीएलओ में लगाई गई थी। स्कूल में वर्क लोड अधिक होने से वह ड्यूटी में असमर्थ थे। तहसीलदार की रिपोर्ट जिसमें आठ शिक्षकों के बीएलओ ड्यूटी में लापरवाही बरतने की बात कही गई थी। 16 अगस्त 2021 को डीएम ने इन शिक्षकों का वेतन रोकने की बीएसए से संस्तुति की थी। इस पर तत्कालीन बीएसए सतीश कुमार ने 17 अगस्त को शिक्षक नीलम देवी, जयप्रकाश, मीना धुरिया, छत्रपाल सिंह, वीना यादव, प्रियंका साहू, रवि कुमार व सुंदरकली का वेतन रोककर स्पष्टीकरण मांगा था। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति तरन श्रीवास्तव ने बीएसए के आदेश को रद्द करते हुए 24 नवंबर को आदेश जारी कर याचिकाकर्ताओं का वेतन बहाल करने और बीएलओ ड्यूटी के लिए बाध्य नहीं करने का आदेश दिया है।

वेतन बहाल कराया जाएगा
प्रभारी बीएसए राकेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि उच्च न्यायालय में बीएलओ ड्यूटी में लापरवाही पर वेतन रोकने वाले दो शिक्षकों ने रिट दायर की थी। न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाया है। दोनों का एसडीएम से पत्राचार कर वेतन बहाल कराया जाएगा।


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