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18 December 2022

कोर्ट आदेश फाइनल होने के बाद मूल नियुक्ति पर सवाल उठाना गलत


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि अंशकालिक अध्यापक को बकाया वेतन देने के आदेश पर, मूल नियुक्ति ही अवैध कह कर सवाल नहीं खड़े किए जा सकते। दस वर्ष पहले वेतन भुगतान आदेश को चुनौती नहीं दी गई, वह फाइनल हो गया।



कोर्ट ने डीआईओएस चंदौली के 5 फरवरी 20 के आदेश को रद्द करते हुए निर्देश दिया कि वह याची की अमर वीर सिंह इंटर कॉलेज धानापुर, चंदौली में अंशकालिक अध्यापन की उपस्थिति का निरीक्षण कर तीन माह में याची के बकाया वेतन का भुगतान करें यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह ने कपिल देव यादव की याचिका पर दिया है।


मामले में एक अध्यापक की प्रोन्नति से पद खाली हुआ, जिसे निरीक्षक ने नियुक्ति के लिए भेजा प्रबंध समिति ने ज्वाइन नहीं
कराया। बाद में अंशकालिक अध्यापक के रूप में याची की 6 जून 1998 में नियुक्ति की गई। उसने 2मई 2012 तक कार्य किया गया। उसे वेतन का भुगतान नहीं किया गया तो उसने हाईकोर्ट की शरण ली। कहा, खाली पद भरने में याची को भी शामिल किया जाए। निरीक्षक ने याची का दावा खारिज कर दिया, जिसे दोबारा चुनौती दी गई। निरीक्षक का आदेश रद्द कर कोर्ट ने याची को 1998 से 2012 तक कार्य के वेतन का भुगतान करने का निर्देश दिया। इसके बाद निरीक्षक ने यह कहते हुए वेतन भुगतान से इन्कार कर दिया कि याची की मूल नियुक्ति ही अवैध थी।

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