टीईटी अनिवार्यता पर राहत की उम्मीद, केंद्र ने राज्यों से मांगी रिपोर्ट
नई दिल्ली। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर देशभर के लाखों शिक्षकों के लिए राहत की उम्मीद जगी है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद सभी राज्यों से यह जानकारी मांगी है कि टीईटी अनिवार्यता के चलते उनके राज्य में कितने शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं।
शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह रिपोर्ट पहली से आठवीं कक्षा तक वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को ध्यान में रखते हुए मांगी गई है। राज्यों को 16 जनवरी तक विस्तृत रिपोर्ट केंद्र को सौंपनी होगी। इस संबंध में 31 दिसंबर को ही सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र भेज दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कार्रवाई
शिक्षा मंत्रालय ने राज्यों से पूछा है कि 1 सितंबर 2025 को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उनके यहां कितने शिक्षक टीईटी की अनिवार्यता से प्रभावित हुए हैं। साथ ही पहली से पांचवीं और छठी से आठवीं कक्षा के शिक्षकों की संख्या, उनकी शैक्षिक योग्यता, प्रशिक्षण स्थिति और आयु वर्गवार विवरण भी मांगा गया है।
मंत्रालय ने 21 से 25 वर्ष, 26 से 30 वर्ष, 31 से 35 वर्ष, 36 से 40 वर्ष, 41 से 45 वर्ष, 46 से 50 वर्ष, 51 से 55 वर्ष, 56 से 60 वर्ष और 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के शिक्षकों का पूरा ब्योरा देने के निर्देश दिए हैं।
यह जानकारी भी मांगी गई
केंद्र सरकार ने राज्यों से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि—
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कितने शिक्षकों की नियुक्ति एनसीटीई की 2011 की अधिसूचना से पहले हुई
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कितने शिक्षक वर्ष 2011 के बाद नियुक्त किए गए
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2011 से पहले टीईटी पास शिक्षकों की संख्या
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कुल टीईटी पास शिक्षक और टीईटी से बाहर होने वाले शिक्षकों की संख्या
यूपी में 1.86 लाख शिक्षक प्रभावित
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (AIRSM) के अनुसार उत्तर प्रदेश में करीब 1.86 लाख शिक्षक टीईटी अनिवार्यता से प्रभावित हो रहे हैं। महासंघ के राष्ट्रीय सह सचिव ने बताया कि संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात कर इस मामले में राहत देने की मांग की है।
महासंघ का कहना है कि एनसीटीई की अधिसूचना में यह स्पष्ट है कि कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यता अधिसूचना की तिथि से ही लागू होती है, इसलिए इससे पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट मिलनी चाहिए।

