प्रयागराज ,राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों में अनियमित तरीके से प्रधानाचार्य बनाए गए 83 प्रवक्ताओं की पदोन्नति निरस्त होने के दो महीने बाद भी वे प्रधानाचार्य पद पर बने हुए हैं। समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने दो साल पहले 17 जनवरी 2024 को प्रयागराज समेत विभिन्न जिलों में 83 प्रवक्ताओं की नियम विरुद्ध तरीके से प्रधानाचार्य (हाईस्कूल) के पद पर पदोन्नति कर दी थी। इसके लिए 17 जनवरी 2024 को प्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नति के लिए प्रवक्ता (कक्षा 11-12) के पद की समकक्षता/ समतुल्यता प्रदान की गयी थी।
उत्तर प्रदेश समाज कल्याण विभाग अध्यापक सेवा नियमावली, 2009 में प्रवक्ता का वेतनमान व उक्त पद पर भर्ती का स्रोत उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से सीधी भर्ती/पदोन्नति से है व प्रवक्ताओं के दायित्व शैक्षिक हैं जबकि समाज कल्याण राजपत्रित अधिकारी, सेवा (प्रथम संशोधन) नियमावली, 2004 के अनुसार प्रधानाचार्य (हाईस्कूल) का वेतनमान व उक्त पद पर भर्ती का स्रोत पदोन्नति एवं प्रधानाचार्य (हाईस्कूल) पर शैक्षिक के साथ प्रशासनिक दायित्व भी है।
प्रवक्ता एवं प्रधानाचार्य (हाईस्कूल) के पद, वेतनमान, भर्ती का स्रोत एवं पदीय दायित्व अलग-अलग होने के बावजूद प्रधानाचार्य (हाईस्कूल) के पद को प्रवक्ता (कक्षा 11-12) के समकक्ष मान लिया गया जो विधिक रूप से एवं वित्तीय नियमों के विपरीत था। यही नहीं कार्मिक विभाग की ओर से कार्यकारी आदेश से पदोन्नतियों पर रोक लगाने के बावजूद प्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नति की गई थी। इसे गंभीरता से लेते हुए अपर मुख्य सचिव एल. वेंकटेश्वर लू ने 16 मार्च को समाज कल्याण विभाग के उपनिदेशक जे. राम के खिलाफ विभागीय कर्रवाई के निर्देश देते हुए पदोन्नतियां निरस्त कर दी थी। हालांकि संबंधित प्रधानाचार्यों को अब तक उनकी पदोन्नति निरस्त होने संबंधी आदेश नहीं मिला है और वह अपने पद पर बने हुए हैं। कुछ प्रधानाचार्यों के कोर्ट में याचिका करने की भी सूचना है हालांकि कोर्ट से निरस्तीकरण पर स्थगन आदेश नहीं मिला है। जिला समाज कल्याण अधिकारी रमाशंकर पटेल का कहना है कि अब तक पदोन्नति निरस्त होने का आदेश प्राप्त नहीं हुआ है।

