त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में विभिन्न पदों पर पिछड़ा वर्ग के लोगों का आरक्षण तय करने के लिए गठित उप्र राज्य स्थानीय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग को रिपोर्ट देने में छह महीने का समय लग सकता है। मंगलवार को आयोग के अध्यक्ष व उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश राम औतार सिंह व सदस्यों ने कार्य शुरू कर दिया।
नैमिषारण्य अतिथि गृह में अध्यक्ष राम औतार सिंह व सदस्यों ने पंचायती राज विभाग के अधिकारियों के संग बैठक की। फिर पत्रकारों से बातचीत में अध्यक्ष ने कहा कि जिलों में जाकर सर्वे व पिछड़ेपन का अध्ययन किया जाएगा। ओबीसी की आबादी और उसके अनुपात में उसका राजनीतिक प्रतिनिधित्व कितना है, इसे आंका जाएगा। यही नहीं जिलों व ब्लॉक स्तर पर इसके लिए बैठकें आयोग करेगा। जहां खुले संवाद में लोग भी अपनी बातें रख सकेंगे। ऐसे में आयोग को अपनी रिपोर्ट देने में छह महीने का समय लग सकता है। उन्होंने कहा कि आयोग का कार्यकाल छह महीने का है। समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग चाहे तो तीन महीने में भी रिपोर्ट दे सकता है लेकिन सघन सर्वे व अध्ययन कार्य में लगने वाले समय के अनुसार उसे अपनी रिपोर्ट तैयार करने की छूट रहती है। यही कारण है कि आयोग का कार्यकाल छह महीने रखा गया है। सदस्य बृजेश कुमार ने कहा कि आयोग आपत्तियां और सुझाव भी स्वीकार करेगा। ऐसे में अब यह संभावना है कि पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद ही हो सकें।
अनुभव का मिलेगा लाभ: समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष राम औतार सिंह, सदस्य बृजेश कुमार व संतोष कुमार विश्वकर्मा इससे पूर्व नगरीय निकाय में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए गठित किए गए आयोग में भी रहे हैं। ऐसे में उन्हें इसका पूरा लाभ मिलेगा।

