उत्तर प्रदेश के परिषदीय उच्च प्राथमिक, कंपोजिट और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में अब छात्राओं को माहवारी के दौरान स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी जरूरी जानकारी दी जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार ने सभी स्कूलों में महावारी स्वच्छता प्रबंधन (एमएचएम) क्लब गठित करने का निर्णय लिया है। इस पहल का उद्देश्य छात्राओं को पीरियड्स के दौरान होने वाली समस्याओं, स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों के प्रति जागरूक बनाना है।
हर स्कूल में 10 से 12 छात्राओं का एक समूह बनाया जाएगा, जो अन्य छात्राओं के बीच जागरूकता फैलाने का काम करेगा। इससे छात्राओं को पीरियड्स के दौरान बेहतर मार्गदर्शन मिलेगा और गंदगी व अस्वच्छता से होने वाली बीमारियों से बचाव संभव हो सकेगा।
अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में यह पहल शुरू की जा रही है। क्लबों के माध्यम से छात्राओं को माहवारी के दौरान स्वच्छता बनाए रखने, स्वास्थ्य का ध्यान रखने और इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने की जानकारी दी जाएगी।
स्कूलों में क्लब गठन की जिम्मेदारी मीना मंच की सुगमकर्ताओं को सौंपी जाएगी। साथ ही प्रत्येक माह डॉक्टरों और एएनएम के साथ “एमएचएम संवाद” कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें छात्राओं के साथ उनकी माताओं को भी आमंत्रित किया जाएगा।
सरकार की योजना के तहत स्कूलों में “पैड बैंक” भी स्थापित किए जाएंगे, ताकि जरूरत पड़ने पर छात्राएं तुरंत सैनिटरी पैड का उपयोग कर सकें। इसके अलावा छात्राओं की संख्या के अनुसार स्कूलों में पर्याप्त मात्रा में सैनिटरी पैड, इनर वियर, अतिरिक्त यूनिफॉर्म, डिस्पोजेबल बैग और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। छात्राओं को पोषण संबंधी परामर्श भी दिया जाएगा।
स्कूलों में एमएचएम कॉर्नर और दीवार पत्रिका भी बनाई जाएगी, जहां माहवारी के दौरान अपनाई जाने वाली सावधानियों और स्वच्छता संबंधी जानकारी प्रदर्शित की जाएगी। जुलाई से अप्रैल तक विभिन्न गतिविधियों के जरिए जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसकी निगरानी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी और जिला समन्वयक बालिका शिक्षा द्वारा की जाएगी।

